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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: सरकारी वकीलों से बदसलूकी बनेगी अदालत की अवमानना

आजमगढ़ SSP के PRO द्वारा सरकारी वकील से दुर्व्यवहार पर हाईकोर्ट सख्त; कोर्ट कस्टडी में भेजा, पुलिस अधिकारियों को चेतावनी जारी करने के आदेश।

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प्रयागराज/वाराणसी (भदैनी मिरर लीगल डेस्क): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्याय व्यवस्था और अदालती आदेशों के पालन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों के लिए एक आधिकारिक सर्कुलर जारी करें। इस सर्कुलर में चेतावनी दी जाए कि अदालती आदेशों के अनुपालन के लिए संपर्क करने वाले सरकारी वकीलों से दुर्व्यवहार करना सीधे तौर पर अदालत की अवमानना (Contempt of Court) माना जाएगा और ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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आजमगढ़ SSP के PRO पर हाईकोर्ट का कड़ा एक्शन

यह निर्देश जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने आजमगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय में तैनात जनसंपर्क अधिकारी (PRO) राजेश कुमार सिंह के कथित दुर्व्यवहार पर सुनवाई करते हुए दिया। आरोप था कि PRO ने कोर्ट के आदेश के अनुपालन की जानकारी देने पहुंचे अपर सरकारी अधिवक्ता (AGA) के साथ अभद्रता की थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने PRO को तुरंत हिरासत में लेने का निर्देश दिया और उन्हें शाम 5 बजे तक अदालती हिरासत (Court Custody) में रखा।

"सरकारी वकील कोर्ट के अधिकारी, उनसे बदसलूकी बर्दाश्त नहीं"

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि अपर सरकारी अधिवक्ता न्यायपालिका के सम्मानित अधिकारी होते हैं। जब वे किसी प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी को अदालती आदेश के पालन हेतु सूचित करते हैं, तो वे अपने विधिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे होते हैं।

पीठ ने टिप्पणी की कि चाहे अधिकारी राज्य के शीर्ष पद पर ही क्यों न बैठा हो, यदि वह अदालती आदेश की जानकारी देने वाले सरकारी वकील से अभद्रता करता है, तो यह न्याय प्रक्रिया में व्यवधान और अवमानना का मामला बनता है।

SSP ने की त्वरित कार्रवाई, हाईकोर्ट ने सराहा

सुनवाई के दौरान आजमगढ़ के SSP खुद कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि आरोपी PRO को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके साथ ही गैर-जमानती वारंट (NBW) के अनुपालन में लापरवाही बरतने वाले महाराजगंज थाने के SHO और दरोगा के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

हाईकोर्ट ने SSP की त्वरित कार्रवाई और उनके बेदाग सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी। साथ ही अदालत ने एक हत्या के मामले में आरोपी की दो अनाथ बेटियों को गोद लेने के SSP के मानवीय कदम की भी सराहना की।

जमानत याचिका खारिज

यह पूरा मामला आरोपी सचिन यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया था, जिस पर बीएनएस (BNS) की धारा 64(1) और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज था। हाईकोर्ट ने केस के गुण-दोष के आधार पर आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी और आदेश की प्रति आवश्यक कार्रवाई हेतु यूपी के DGP को भेजने का निर्देश दिया।