
कोरोना में बने भगवान....आज भी क्लिनिक पर फ्री में जांच, जानिए वाराणसी के डॉक्टर डॉ. एस.के अग्रवाल की कहानी, जिन्हें जापान में मिला अवार्ड


डॅाक्टर को यूंही धरती पर भगवान का दर्जा नहीं दिया जाता है, वह केवल मरीज का इलाज ही नहीं करते बल्कि उसे मौत के मुंह से खीच लाते है। जब पूरा देश कोरोना का दंश झेल रहा था, उस दौरान कई ऐसे डॅाक्टर सामने आए जिन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपना फर्ज निभाया और लोगों को नई जिंदगी दी। आज हम आपको वाराणसी के एक ऐसे ही चिकित्सक के बारे में बताएंगे, जब सभी जगहों पर ताला लटका गया था, तो भी उनके क्लीनिक के द्वार खुले थे। उन्होंने एक दो नहीं बल्कि असंख्य ऐसे मरीज को ठीक किया है, जो जीवन की उम्मीद को खो चुके थे। उनकी क्लिनिक पर कई आधुनिक और महंगी जांचे निःशुल्क होती है।



जानें कौन है वह डॅाक्टर
हम बात कर रहे है वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट और पूर्व प्रोफेसर, बी.एच.यू. के टी.बी. एवं रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. अग्रवाल (Dr. SK Agarwal) की, जिनके डॉक्टर बनने का सफर घर के माहौल और पिता से मिली प्रेरणा से शुरू हुआ। उनके पिता स्वयं चेस्ट स्पेशलिस्ट थे।


करियर की निर्णायक घटना तब हुई जब एक गंभीर मरीज, जिसे आधी बाल्टी खून की खाँसी हुई थी, जो उनकी देखभाल से पूरी तरह ठीक हो गया। इस घटना ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि डॉक्टर होना केवल पेशा नहीं, बल्कि जीवन बचाने का संकल्प है।
विशेष कार्य और उपलब्धियाँ
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क्लिनिक में आधुनिकतम जांचें नि:शुल्क उपलब्ध।
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अस्थमा रोगियों के लिए इनहेलेशन थेरेपी को बढ़ावा दिया।
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कोविड-19 महामारी में नि:शुल्क ऑनलाइन कंसल्टेशन के जरिए हजारों मरीजों को राहत दी।
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रोगियों को डिवाइस का सही उपयोग स्वयं सिखाया।
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2012 में 6 मिनट बॉक टेस्ट विद पल्स ऑक्सीमीटर शुरू किया, जो कोविड-19 में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
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1995 से अस्थमा जागरूकता अभियान चलाया, देश-विदेश में 100+ व्याख्यान दिए।
अस्थमा अब लाइलाज नहीं
डॅाक्टर अग्रवाल ने अस्थमा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें वायुमार्ग सूज जाते हैं और साँस लेने में कठिनाई होती है। इसके लक्षणों में खांसी, घरघराहट और सीने में जकड़न शामिल हैं। अस्थमा के कारण में एलर्जी, धुआं, ठंडा मौसम, व्यायाम, तेज़ गंध और तनाव शामिल हो सकते हैं।
डॉ. अग्रवाल का कहना है कि अस्थमा अब लाइलाज नहीं है। त्वरित राहत और दीर्घकालिक चिकित्सा के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है। दीर्घकालिक दवाओं से वायुमार्ग की संवेदनशीलता और सूजन कम होती है।


विटामिन डी और अस्थमा
कुछ अध्ययनों में विटामिन डी की कमी को अस्थमा से जोड़ा गया है। विटामिन डी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और सूजन कम करने में मदद करता है। हालांकि, यह केवल एक कारक है और अस्थमा के लिए डॉक्टर से परामर्श सबसे सुरक्षित उपाय है।
सम्मान और पहचान
डॉ. अग्रवाल को हाल ही में जापान में Pioneer in Pulmonary Medicine सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा भी उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। 45+ वर्षों के अनुभव के साथ वे टी.बी.,अस्थमा और चेस्ट रोगों के विशेषज्ञ हैं और वर्तमान में वाराणसी के संकटमोचन क्षेत्र में खुद का अग्रवाल क्लिनिक संचालित कर और लोगों की सेवा कर रहे हैं।

