काशी में ‘मसान की होली’ पर विवाद: अजय शर्मा बोले- यह अशास्त्रीय, अधर्म और चंदा-नशेबाजी का अड्डा
केंद्रीय ब्राम्हण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा का बड़ा बयान— महाश्मशान मनोरंजन का नहीं, मोक्ष और वैराग्य की भूमि है
वाराणसी, Bhadaini Mirror| धर्मनगरी काशी में मसान की होली को लेकर एक बार फिर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। भदैनी मिरर से विशेष बातचीत में अजय शर्मा, जो केंद्रीय ब्राम्हण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष और सनातन रक्षक दल के प्रदेश प्रभारी हैं, ने मसान की होली को अशास्त्रीय, अधर्म और विकृत परंपरा करार दिया।


अजय शर्मा ने कहा कि मणिकर्णिका घाट कोई उत्सव स्थल नहीं, बल्कि स्वयं भगवान शिव की विश्राम-भूमि और मोक्ष का द्वार है। यहां प्रज्वलित हर चिता और उड़ती भस्म जीवन की नश्वरता का बोध कराती है। ऐसी पवित्र भूमि पर डीजे, नृत्य, शराब और हंगामा सनातन परंपरा के विपरीत है।

“शास्त्रों में मसान की होली का कोई उल्लेख नहीं”
अजय शर्मा ने चुनौती देते हुए कहा कि आयोजक आज तक यह प्रमाणित नहीं कर सके कि किस पुराण, शास्त्र या काशी के किसी इतिहासकार ने “मसान की होली” का वर्णन किया है।
उन्होंने कहा-“काशी के लोटा-भंटा जैसे पर्वों का उल्लेख साहित्यकारों ने किया है, लेकिन मसान की होली का कहीं कोई प्रमाण नहीं है। यह मीडिया प्रचार और चंदा उगाही से खड़ी की गई परंपरा है।”

“नशेबाजी और चंदा उगाही का केंद्र बन गया श्मशान”
अजय शर्मा का आरोप है कि बीते 10–12 वर्षों में मसान की होली एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नशेबाजों और अव्यवस्था का अड्डा बन गई है।
उन्होंने दावा किया कि-शराब, गांजा, भांग का खुलेआम सेवन होता है। लाखों रुपये का चंदा वसूला जाता है, शवयात्राओं और चिताओं की मर्यादा भंग होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष उनके विरोध के कारण डीजे पर रोक लगी थी और आगे आवश्यकता पड़ी तो मसान की होली को पूरी तरह बंद कराने के लिए आंदोलन तेज किया जाएगा।
“श्मशान गृहस्थों के लिए सूतक का स्थान”
अजय शर्मा ने धार्मिक तर्क देते हुए कहा कि श्मशान में अनायास प्रवेश से गृहस्थ जीवन वालों पर सूतक लगता है। “ऐसे में वहां जाकर हंगामा करना और फिर मंदिरों में दर्शन करना स्वयं मंदिरों की पवित्रता को भी प्रभावित करता है।”
पर्यटन और रोजगार के तर्क को किया खारिज
मसान की होली को पर्यटन और रोजगार से जोड़ने के तर्क पर अजय शर्मा ने कहा कि धर्म के नाम पर अधर्म स्वीकार्य नहीं हो सकता। “जो परंपरा लोगों को धर्म से भटकाकर तंत्र-मंत्र, मजार और ओझाओं की ओर ले जाए, वह सनातन को कमजोर करती है।”
“जो समर्थन करेगा, वह शिवद्रोही”
बातचीत के अंत में अजय शर्मा ने दो टूक कहा-“मसान की होली अधर्म है। जो इसका समर्थन करेगा, वह शिवद्रोही और धर्मद्रोही होगा।” उन्होंने काशीवासियों से अपील की कि महाश्मशान की गरिमा और सनातन परंपरा की रक्षा के लिए सजग होकर आवाज उठाएं। “धर्मो रक्षति रक्षितः”— धर्म की रक्षा करने वाला ही अंततः सुरक्षित रहता है।
