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25 जुलाई से बदलेगा सृष्टि का संचालन! योगनिद्रा में श्रीहरि, महादेव करेंगे जगत का पालन

भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाते ही लगेगी सभी मांगलिक कार्यों पर रोक, जानें इन चातुर्मास में किन नियमों का करना चाहिए पालन 

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वाराणसी (भदैनी मिरर): सृष्टि के पालनहार श्रीहरि विष्णु के विश्राम का समय अब निकट आ गया है। सनातनी मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु हरिशयनी (देवशयनी) एकादशी से लेकर कार्तिक मास की देवोत्थान एकादशी तक, यानी पूरे चार महीने तक योगनिद्रा में लीन रहेंगे। इस चार महीने के कालखंड (चातुर्मास) में सृष्टि के संहारक देवों के देव महादेव (भगवान शिव) ब्रह्मांड का राजकाज और नारायण के दायित्वों का पालन करेंगे।

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25 जुलाई को मनाई जाएगी हरिशयनी (देवशयनी) एकादशी

हरिशयनी एकादशी को पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जुलाई की सुबह 09:12 बजे शुरू होगी और इसका समापन 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे होगा। उदया तिथि की मान्यता के कारण हरिशयनी एकादशी का व्रत और पूजन 25 जुलाई को ही किया जाएगा।

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बन रहा है खास नक्षत्र और साध्य योग का संयोग

इस बार की देवशयनी एकादशी ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास है:

  • विशाखा नक्षत्र: 24 जुलाई की शाम 07:52 बजे से शुरू होकर 25 जुलाई की रात 10:42 बजे तक (25 घंटे से अधिक समय तक) रहेगा।

  • साध्य योग: 24 जुलाई की रात 08:36 बजे से आरंभ होकर 25 जुलाई की रात 09:27 बजे तक रहेगा।

शुरू हो जाएगा चातुर्मास, मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम

25 जुलाई को हरिशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। हालांकि, धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और व्रत विधि-विधान से किए जा सकते हैं। चातुर्मास का यह क्रम कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रबोधिनी (देवोत्थान) एकादशी तक चलता है। इस वर्ष देवोत्थान एकादशी 20 नवंबर को पड़ेगी, जिसके बाद मांगलिक कार्य पुनः शुरू हो जाएंगे।

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चातुर्मास में क्या हैं नियम और क्या है वर्जित?

चातुर्मास के दौरान यम-नियम और संयम का पालन करना बहुत आवश्यक माना गया है:

  • खान-पान में परहेज: इन चार महीनों में गुड़, तेल, शहद, मूली, परवल, बैंगन और साग-पात का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • बाहर का भोजन मना: परिजनों के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा दिया गया दही और चावल (भात) भूलकर भी नहीं खाना चाहिए।

  • यात्रा से बचें: चातुर्मास व्रत का पालन करने वालों को तीर्थाटन या भ्रमण से बचना चाहिए और एक ही स्थान पर रहकर ईश्वर की आराधना करनी चाहिए।

  • ब्रह्मचर्य: इस पूरी अवधि में ब्रह्मचर्य का पूर्ण रूप से पालन करना अनिवार्य बताया गया है।