Varanasi: मुमुक्षु भवन में ‘शिवाय विष्णु रूपाय’ महायज्ञ का आयोजन, होगा 24 घंटे विष्णु सहस्रनाम पाठ और एक लाख बिल्वार्चना
विश्व शांति और धर्म रक्षा के संकल्प के साथ तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान, देश-विदेश से 1500 से अधिक श्रद्धालु होंगे शामिल
वाराणसी। काशी में विश्व शांति और धर्म रक्षा के संकल्प के साथ एक भव्य धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। श्री श्री श्री श्रृंगेरी शारदा पीठम के दोनों जगद्गुरुओं के दिव्य आशीर्वाद से कल्वाकोलानु चितरंजन दास मेमोरियल सेवा संगठन, हैदराबाद (तेलंगाना) की ओर से काशी के मुमुक्षु भवन परिसर स्थित सहस्त्रलिंगेश्वर क्षेत्र में ‘शिवाय विष्णु रूपाय’ नामक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।


इस आयोजन का नेतृत्व ब्रह्मश्री कल्वाकोलानु श्री रामचन्द्रमूर्ति और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती जयलक्ष्मी रामचन्द्रमूर्ति के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
तीन दिन तक चलेंगे विशेष अनुष्ठान
कार्यक्रम की शुरुआत महा संकल्प और गणपति पूजन से होगी। इसके बाद पुण्य वाचन, मंडप स्थापना और यज्ञशाला प्रवेश के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।

तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में
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गणपति हवन
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रुद्र हवन
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नवग्रह हवन
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गायत्री हवन
जैसे विशेष यज्ञ आयोजित किए जाएंगे।
24 घंटे होगा विष्णु सहस्रनाम का अखंड पाठ
मंदिर परिसर में विष्णु सहस्रनाम का 24 घंटे अखंड पारायण किया जाएगा। इसके साथ ही एक लाख बिल्वार्चना और एक लाख रुद्राक्ष अर्चना का भी आयोजन होगा।
इसके अलावा महिलाओं द्वारा
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हनुमान चालीसा पारायण
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सौंदर्य लहरी पाठ
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ललिता सहस्रनाम पारायण
भी किया जाएगा।

अस्सी घाट पर होगा सामूहिक संध्यावंदन
कार्यक्रम के दौरान अस्सी घाट के तट पर ब्राह्मणों द्वारा सामूहिक संध्यावंदन भी किया जाएगा। आयोजन के अंत में मंत्र पुष्प और प्रसाद वितरण के साथ अनुष्ठान का समापन होगा।
देश-विदेश से आएंगे श्रद्धालु
आयोजकों के अनुसार इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में करीब 1500 से 2000 श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक सहित देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालु काशी पहुंच रहे हैं।
विश्व कल्याण के लिए विशेष संकल्प
आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन विश्व शांति और मानव कल्याण के उद्देश्य से किया जा रहा है। उनका मानना है कि मंत्र जाप और यज्ञ के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और विश्व में शांति का संदेश जाएगा।
संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि इससे पहले भी संस्था ने अयोध्या में शतकोटि गायत्री महायज्ञ और काशी में महारुद्र यज्ञ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों का सफल आयोजन किया है।
आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि जाति, लिंग और आयु के भेदभाव के बिना सभी लोग इस आध्यात्मिक उत्सव में शामिल होकर भगवान की पूजा-अर्चना करें और विश्व कल्याण के संकल्प में सहभागी बनें।
