शारदीय नवरात्र 2026: काशी में कलश स्थापना के लिए मात्र 47 मिनट का शुभ मुहूर्त
शिव की नगरी काशी में कल से गूंजेगी माता की जयकारे; जानें घटस्थापना का सही समय, तिथियां और नौ दिनों में किस मंदिर में होगी किस देवी की पूजा।
भदैनी मिरर धार्मिक डेस्क: देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में रविवार से श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ शारदीय नवरात्र का महापर्व शुरू हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान के दौरान काशी के कोने-कोने में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की अलौकिक आराधना होगी। घरों से लेकर मंदिरों तक कलश स्थापना (घटस्थापना) की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

कलश स्थापना के लिए 47 मिनट का शुभ मुहूर्त
बीएचयू के ज्योतिषाचार्य प्रो. विनय पांडेय के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 11 अक्टूबर (रविवार) को नवरात्र का प्रथम दिवस मान्य होगा।
इस बार नवरात्र का आरंभ चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के विशेष संयोग में हो रहा है। घरों और प्रतिष्ठानों में घट स्थापना के लिए 11 अक्टूबर को सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक कुल 47 मिनट का अत्यंत शुभ मुहूर्त रहेगा।
नवरात्र के प्रमुख पड़ाव और तिथियां
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16 अक्टूबर: बिल्व वृक्ष के पास देवी को निमंत्रण।
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17 अक्टूबर: पत्रिका प्रवेशन, सरस्वती पूजा और मूर्ति स्थापना।
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18 अक्टूबर: महाअष्टमी व्रत एवं रात्रि में महानिशा पूजन।
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19 अक्टूबर: महानवमी का व्रत एवं हवन का प्रारंभ (सुबह 7:40 के बाद)।
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20 अक्टूबर: हवन की पूर्णाहुति (सुबह 9:20 तक) और घट/प्रतिमा विसर्जन।
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21 अक्टूबर: व्रत का पारण और भगवती की प्रतिमा का उत्थापन व विसर्जन।
काशी में नौ दिनों तक इन 9 मंदिरों में करें माँ के स्वरूपों के दर्शन
काशी में नवरात्र के दौरान प्रतिदिन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन-पूजन का विशेष विधान है:
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प्रथम - मां शैलपुत्री (अलईपुर): वरुणा नदी के समीप स्थित इस प्राचीन मंदिर में पर्वतराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री के दर्शन से नवरात्र का आगाज होता है।
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द्वितीय - मां ब्रह्मचारिणी (दुर्गा घाट): तपस्या और ज्ञान की प्रतीक मां ब्रह्मचारिणी का दरबार दुर्गा घाट पर सुशोभित है।
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तृतीय - मां चंद्रघंटा (चौक): चौक क्षेत्र के सूतटोला (गोविंदपुरा गली) में स्थित मां चंद्रघंटा भक्तों के सभी कष्टों का हरण करती हैं।
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चतुर्थ - मां कूष्मांडा (दुर्गाकुंड): लाल पत्थरों से निर्मित दुर्गाकुंड मंदिर में मां कूष्मांडा जागृत स्वरूप में विराजमान हैं।
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पंचम - मां स्कंदमाता (जैतपुरा): भगवान कार्तिकेय की माता स्कंदमाता का यह मंदिर जैतपुरा स्थित बागेश्वरी देवी परिसर में है।
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षष्ठी - मां कात्यायनी (सिंधिया घाट): महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रकट कात्यायनी देवी का मंदिर सिंधिया घाट के पास स्थित है।
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सप्तमी - मां कालरात्रि (कालिका गली): गोदौलिया-चौक मार्ग पर कालिका गली में असुरों का संहार करने वाली महाशक्ति कालरात्रि का धाम है।
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अष्टमी - मां महागौरी (अन्नपूर्णा मंदिर, विश्वनाथ गली): दुर्गाष्टमी पर काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप स्थित मां अन्नपूर्णा को ही महागौरी का मुख्य स्वरूप मानकर पूजा जाता है।
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नवमी - मां सिद्धिदात्री (मैदागिन): नवरात्र के अंतिम दिन कालभैरव क्षेत्र के पास गोलघर (सिद्धिमाता गली) में स्थित सिद्धिदात्री माता के दर्शन से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
