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शारदीय नवरात्र 2026: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के दर्शन को उमड़ी भक्तों की भीड़, जानें काशी में क्यों है खास मान्यता

मस्तक पर अर्धचंद्र और घंटे की ध्वनि से होता है नकारात्मक शक्तियों का संहार; माता के जयकारों और घंटे के नाद से गुंजायमान हुआ मंदिर

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तीसरा दिन नवरात्र
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वाराणसी(भदैनी मिरर)। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन धर्मनगरी काशी में मां चंद्रघंटा के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर के पट खुलते ही दर्शनार्थियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से माता रानी की पूजा-अर्चना कर देश, समाज और अपने परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की कामना की। नवरात्र के पावन अवसर पर मंदिर में माता का अत्यंत भव्य और आकर्षक श्रृंगार किया गया था। पूरा मंदिर परिसर भक्तों के जयकारों और घंटे के नाद से भक्तिमय बना रहा।

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शांति,शक्ति और साहस का प्रतीक है मां का स्वरूप

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा का स्वरूप शांति, शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। माता के मस्तक पर विराजमान अर्धचंद्र और हाथ का घंटा उनके दिव्य स्वरूप का स्पष्ट संदेश देते हैं। शास्त्रानुसार, मस्तक का चंद्रमा शांति का प्रतीक है, जबकि घंटे का नाद नकारात्मक शक्तियों का नाश कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, असुरों के साथ युद्ध के दौरान देवी ने अपने घंटे की भयानक ध्वनि (नाद) मात्र से ही दुष्ट शक्तियों का संहार कर दिया था।

काशी में है मोक्षदायिनी मान्यता

मंदिर के पुजारी वैभवनाथ योगेश्वर ने बताया कि नवरात्र के क्रम में तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के दर्शन-पूजन का विशेष विधान है। माता का स्वरूप स्वर्ण के समान चमकीला और कांतिमान है।

उन्होंने बताया कि काशी में मां चंद्रघंटा को लेकर एक बेहद प्राचीन और विशेष मान्यता है। ऐसी लोक मान्यता है कि जब भी किसी मनुष्य का अंतिम समय आता है और उसके प्राण निकल रहे होते हैं, तब माता चंद्रघंटा उसके कंठ में विराजमान होकर अपने घंटे की ध्वनि से उसे मोक्ष प्रदान करती हैं।

नारियल, चुनरी और प्रसाद से मां की आराधना

नवरात्र के तीसरे दिन मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता रानी को नारियल, चुनरी, फल और मिष्ठान अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं। भक्तों में दर्शन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुजारी जी ने कहा कि मां चंद्रघंटा अपने सभी भक्तों पर कृपा बनाए रखती हैं और सच्चे मन से की गई आराधना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।