पौष पूर्णिमा 2026: माघ स्नान और कल्पवास का शुभारंभ, चन्द्रबल वृद्धि का दुर्लभ संयोग
तीर्थराज प्रयाग में माघ मास का पुण्यकाल शुरू, स्नान–दान–व्रत से मिलता है सौ हजार गाय दान के बराबर फल
प्रयागराज। पौष पूर्णिमा 2026 के साथ ही माघ मास के पवित्र स्नान का शुभारंभ हो जाएगा। धर्मशास्त्रों के अनुसार, इसी दिन से तीर्थराज प्रयाग के संगम तट पर एक माह तक चलने वाले कल्पवास और माघ स्नान का पुण्यकाल आरंभ होता है। मान्यता है कि माघ मास में संगम में प्रतिदिन स्नान करने से सौ हजार गायों के दान के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है।



धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि पौष पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर भगवान मधुसूदन का पूजन करना चाहिए। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना, यथाशक्ति दान देना और सायंकाल सत्य नारायण भगवान की कथा का आयोजन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
माघ स्नान से मिलती है दिव्य फल-प्राप्ति

धर्मशास्त्रों के अनुसार, जो श्रद्धालु माघ मास में नियमपूर्वक स्नान करता है, वह देव-विमान में बैठकर स्वर्गलोक में विहार करने का अधिकारी बनता है। ऐसी मान्यता है कि संगम के पवित्र जल में प्राणदायी और रोगनाशक शक्ति विद्यमान है, जो तन और मन—दोनों को शुद्ध करती है।
महाभारत के अनुशासन पर्व में भी माघ स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। ग्रंथों के अनुसार, माघ मास में प्रयागराज में तीन करोड़ दस हजार तीर्थों का समागम होता है। जो व्यक्ति इस काल में संयम, व्रत और नियम के साथ स्नान करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर स्वर्ग को प्राप्त करता है।

पौष पूर्णिमा पर चन्द्र देव की विशेष आराधना
पौष पूर्णिमा के दिन व्रत रखने वालों को प्रातःकाल नदी या सरोवर में स्नान कर देवताओं का पूजन एवं पितरों का तर्पण करना चाहिए। इसके साथ ही चन्द्रमा की शांति और बलवृद्धि के लिए सफेद चंदन, चावल, सफेद पुष्प, धूप-दीप और श्वेत वस्त्र से चन्द्र देव की पूजा का विधान है।
स्नान के साथ दान का विशेष महत्व
माघ मास में स्नान के साथ दान को अत्यंत फलदायी बताया गया है। विशेष रूप से ठंड के मौसम में कंबल, ऊनी वस्त्र और जरूरतमंदों को अन्न दान करने से पुण्य की वृद्धि होती है। जो लोग पूरे महीने दान न कर सकें, वे कम से कम पूर्णिमा और अमावस्या के दिन दान कर लोक-परलोक को संवार सकते हैं।
चन्द्रबल बढ़ाने का शुभ अवसर
जिन जातकों की जन्मकुंडली में चन्द्रमा की महादशा चल रही हो या जो मानसिक तनाव और अस्थिरता से जूझ रहे हों, उनके लिए पौष पूर्णिमा विशेष मानी जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन नौ रत्ती का मोती चांदी की अंगूठी में दाहिने हाथ की कनिष्ठिका में धारण करना लाभकारी होता है। विशेष फल के लिए गले में अर्धचंद्राकार लॉकेट में मोती धारण करने की भी सलाह दी जाती है।
