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जेष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगरनाथ का होगा जलाभिषेक, अगले 15 दिन रहेंगे अज्ञातवास पर

अत्यधिक स्नान के बाद 30 जून से 13 जुलाई तक अज्ञातवास (बीमार) में रहेंगे महाप्रभु, भक्तों में बंटेगा जड़ी-बूटी का काढ़ा; 15 जुलाई को निकलेगी डोली यात्रा

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भदैनी मिरर, वाराणसी: काशी के दक्षिणी छोर यानी अस्सी क्षेत्र में विराजमान भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक और पारंपरिक वार्षिक 'स्नान यात्रा' इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आगामी 29 जून को आयोजित की जाएगी। वैसे तो काशी का ऐतिहासिक रथयात्रा मेला पूरे देश में विख्यात है, लेकिन भगवान की इस पावन स्नान यात्रा के बारे में आज भी स्थानीय स्तर पर कई लोग अनजान हैं। इसी उद्देश्य से 'ट्रस्ट श्री जगन्नाथजी' के अध्यक्ष व पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह ने सभी काशीवासियों को इस भव्य आयोजन में शामिल होने के लिए सार्वजनिक आमंत्रण दिया है।

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शुक्रवार को महमूरगंज स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह ने बताया कि महाप्रभु जगन्नाथ की स्नान यात्रा 29 जून को भोर में 05:11 बजे से वैदिक रीति-रिवाज के साथ शुरू होगी।

स्नान के बाद बीमार होंगे महाप्रभु, 14 दिनों तक बंद रहेंगे पट

सनातन परंपरा और सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन अत्यधिक स्नान करने के कारण भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं। इसी अनूठी आस्था के तहत इस वर्ष भी स्नान यात्रा के अगले दिन यानी 30 जून से लेकर 13 जुलाई तक प्रभु पूरी तरह 'अज्ञातवास' (एकांतवास) में चले जाएंगे। इस दौरान मंदिर के मुख्य कपाट (पट) भक्तों के लिए पूरी तरह बंद रहेंगे।

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इन 14 दिनों के अज्ञातवास के दौरान केवल मंदिर के मुख्य पुजारी ही गर्भगृह में प्रवेश कर सकेंगे। बीमार प्रभु को स्वस्थ करने के लिए प्रतिदिन विशेष जड़ी-बूटियों से तैयार 'काढ़ा' का भोग लगाया जाएगा। यही औषधीय काढ़ा मंदिर आने वाले भक्तों में मुख्य प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।

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14 जुलाई को दर्शन और 15 को निकलेगी डोली यात्रा

अज्ञातवास की अवधि समाप्त होने के बाद 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ पूरी तरह स्वस्थ होकर पुनः अपने भक्तों को 'नवयौवन रूप' में दर्शन देंगे। इसके अगले दिन यानी 15 जुलाई को शाम 05:15 बजे महाप्रभु की भव्य डोली यात्रा निकाली जाएगी, जो अपने पारंपरिक और प्राचीन मार्ग से होते हुए विख्यात रथयात्रा चौराहे पर पहुंचेगी, जहाँ से ऐतिहासिक मेले की शुरुआत होगी।

विश्वनाथ धाम की तर्ज पर भव्य बन रहा है जगन्नाथ मंदिर

प्रेस वार्ता के दौरान अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार और नवीनीकरण को लेकर पूछे गए एक सवाल पर अध्यक्ष बृजेश सिंह ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मंदिर के सुंदरीकरण के काम को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ किया जा रहा है। मंदिर परिसर के आसपास रहने वाले किसी भी नागरिक या किराएदार के साथ कोई जोर-जबरदस्ती नहीं की जा रही है। सबकी सहमति और सुविधा का ध्यान रखते हुए काम आगे बढ़ रहा है। कई प्रभावितों को मुआवजा दिया जा चुका है और शेष को भी नियमानुसार दिया जा रहा है।

उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि जीर्णोद्धार के बाद यह मंदिर इतना भव्य स्वरूप ले लेगा कि श्री काशी विश्वनाथ धाम आने वाला देश-दुनिया का हर एक शिवभक्त और तीर्थयात्री भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने भी अस्सी अवश्य आएगा।