May 2026 Festival List: मई में बुद्ध पूर्णिमा, वट सावित्री और गंगा दशहरा जैसे बड़े त्योहार; देखें व्रत-पंचांग की पूरी लिस्ट
खास संयोग: 16 मई को शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का अद्भुत संगम।
वाराणसी (भदैनी मिरर):
मई 2026 का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। इस महीने में न केवल बुद्ध पूर्णिमा और गंगा दशहरा जैसे पावन पर्व पड़ेंगे, बल्कि ज्येष्ठ अधिकमास की शुरुआत भी होगी। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दौरान भगवान विष्णु और महादेव की आराधना का विशेष फल प्राप्त होगा। आइए जानते हैं मई महीने के प्रमुख व्रत और त्योहारों की विस्तृत सूची।


मई 2026 के प्रमुख व्रत-त्योहार कैलेंडर
| तिथि और दिन | व्रत / त्योहार |
| 01 मई, शुक्रवार | वैशाख बुद्ध पूर्णिमा, वैशाख स्नान समाप्त |
| 03 मई, रविवार | नारद जयंती |
| 13 मई, बुधवार | अपरा एकादशी |
| 14 मई, गुरुवार | गुरु प्रदोष व्रत |
| 16 मई, शनिवार | शनि जयंती, वट सावित्री व्रत (अमावस्या) |
| 17 मई, रविवार | ज्येष्ठ अधिकमास (मलमास) प्रारंभ |
| 25 मई, सोमवार | गंगा दशहरा |
| 26 मई, मंगलवार | पद्मिनी एकादशी (अधिकमास एकादशी) |
| 28 मई, गुरुवार | गुरु प्रदोष व्रत |
प्रमुख त्योहारों का महत्व
1. बुद्ध पूर्णिमा (1 मई):
मई महीने का आगाज बुद्ध पूर्णिमा से हो रहा है। इसी दिन महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। हिंदू धर्म में इसे भगवान विष्णु के अवतार के रूप में मनाया जाता है। काशी के गंगा घाटों पर इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है।
2. वट सावित्री व्रत और शनि जयंती (16 मई):

16 मई को शनिवार का दिन है और इसी दिन ज्येष्ठ अमावस्या पड़ रही है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री का व्रत रखेंगी, वहीं इसी दिन शनिदेव का जन्मोत्सव यानी शनि जयंती भी मनाई जाएगी। शनिवार को अमावस्या होने से यह 'शनैश्चरी अमावस्या' का फल भी देगी।

3. ज्येष्ठ अधिकमास प्रारंभ (17 मई):
17 मई से ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) शुरू हो रहा है। शास्त्रों के अनुसार, जिस महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होती, उसे अधिकमास कहा जाता है। इस दौरान विवाह, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे, लेकिन दान-पुण्य और जप-तप के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
4. गंगा दशहरा (25 मई):
माना जाता है कि इसी तिथि पर माँ गंगा का स्वर्ग से धरती पर अवतरण हुआ था। काशी के घाटों पर गंगा दशहरा का उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।
5. पद्मिनी एकादशी (26 मई):
अधिकमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी या कमला एकादशी कहते हैं। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत अत्यंत दुर्लभ और पुण्यकारी माना गया है।
