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वाराणसी में श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया अघोर परंपरा का प्रमुख पर्व ‘लोलार्क षष्ठी’

बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड में लगा श्रद्धालुओं का सैलाब, अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी के दर्शन को उमड़ा जनसमुदाय

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रक्तदान शिविर में 80 से अधिक श्रद्धालुओं ने किया स्वैच्छिक रक्तदान 

प्रशासनिक सुरक्षा-व्यवस्था के बीच सकुशल संपन्न हुआ पर्व

वाराणसी। दुनिया के सबसे प्राचीन और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण शहर काशी में अघोर परंपरा का प्रमुख पर्व 'लोलार्क षष्ठी’ इस बार 29 अगस्त 2025 को धूमधाम और श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया। यह पर्व अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम जी के जन्मोत्सव के छठवें दिन के रूप में सदियों से मनाया जाता आ रहा है। इस अवसर पर वाराणसी स्थित बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड में देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं, अघोर साधकों, संतों और अनुयायियों का जमावड़ा लगा।
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सुबह आश्रम की आरती और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद जैसे ही वर्तमान पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी दर्शन के लिए अपने कक्ष से बाहर आए, पूरा परिसर शंख, डमरू और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा। तत्पश्चात समाधियों की पूजा-अर्चना और परंपरागत अनुष्ठानों के बीच भक्तों ने कतारबद्ध होकर अपने आराध्य का दर्शन किया।
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आस्था और अध्यात्म के इस पर्व के साथ ही समाजिक सरोकार का भी संगम देखने को मिला। अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान की महिला मंडल द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में 80 से अधिक लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और रक्तदान किया।
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आश्रम परिसर के बाहर विशाल मेले का आयोजन हुआ, जहां सैकड़ों दुकानें और हजारों श्रद्धालु खरीदारी में शामिल हुए। अनुमानित भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने दो दिन पहले से ही सुरक्षा और व्यवस्थाओं की तैयारी कर ली थी। प्रशासनिक अधिकारियों और आश्रम प्रबंधन के बीच समन्वय के चलते यह आध्यात्मिक पर्व सकुशल और शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
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