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पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 आज से शुरू, जानें रथ यात्रा का इतिहास और महत्व 

भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा संग मौसी के घर रवाना होंगे महाप्रभु;इस बार की गई है खास तैयारियां
 

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पुरी (भदैनी मिरर): आस्था, श्रद्धा और भव्यता के अनूठे संगम 'विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा 2026' की शुरुआत आज यानी 16 जुलाई (गुरुवार) से ओडिशा के तटीय शहर पुरी में हो रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को होने वाली इस ऐतिहासिक यात्रा के लिए पुरी पूरी तरह सज-धज कर तैयार है।

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इस वर्ष देश-विदेश से लगभग 30 लाख श्रद्धालुओं के पुरी पहुंचने की उम्मीद है। महाप्रभु जगन्नाथ, अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और लाडली बहन देवी सुभद्रा के साथ रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे और भक्तों को दर्शन देंगे।

सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम: आसमान से ड्रोन तो समुद्र में नौसेना तैनात

ओडिशा के डीजीपी वाईबी खुरानिया और अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) संजय कुमार ने बताया कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढील नहीं दी गई है।

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  • सुरक्षा बल: केंद्रीय सशस्त्र बलों की 15 कंपनियों (एनएसजी, आरएएफ, सीआरपीएफ और बीएसएफ) के साथ लगभग 13,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

  • हाई-टेक निगरानी: भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक और आधुनिक ड्रोन्स से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।

  • तटीय सुरक्षा: समुद्र तट पर 500 लाइफगार्ड्स तैनात हैं। साथ ही भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल (Coast Guard) और समुद्री पुलिस की संयुक्त टीमें समुद्र में गश्त कर रही हैं।

सिंहद्वार पर सजे महाप्रभु के तीन दिव्य रथ

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के अनुसार, पारंपरिक रूप से अक्षय तृतीया से शुरू हुआ रथों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। देवताओं से आज्ञामाला (औपचारिक अनुमति) मिलने के बाद तीनों रथों को 12वीं सदी के मुख्य मंदिर के सिंहद्वार पर लाकर खड़ा कर दिया गया है।

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इस यात्रा में तीनों भाई-बहनों के लिए अलग-अलग विशेषताओं वाले रथ होते हैं:

  1. नंदीघोष (Nandighosha): यह स्वयं भगवान जगन्नाथ का रथ है, जो सबसे ऊंचा और बड़ा होता है। इसमें 16 पहिए होते हैं और इसे लाल व पीले रंग के कपड़ों से सजाया जाता है।

  2. तालध्वज (Taladhwaja): यह बड़े भाई भगवान बलभद्र का दिव्य रथ है।

  3. दर्पदलन (Darpadalan): इसे 'पद्मध्वज' भी कहा जाता है, जो बहन देवी सुभद्रा का रथ है।

श्रद्धालु इन विशाल रथों को नारियल के रेशों से बनी 250 फीट लंबी पवित्र रस्सियों के सहारे खींचकर करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर तक ले जाएंगे।

जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी 5 गहरी मान्यताएं

  • मौसी के घर प्रस्थान: मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ 9 दिनों की वार्षिक यात्रा पर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं, जिसे उनका जन्मस्थान भी माना जाता है। वहां वे मौसी के हाथ के बने स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद लेते हैं।

  • बिना भेदभाव के दर्शन: जगन्नाथ मंदिर के भीतर गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। इसलिए, ब्रह्मांड के नाथ स्वयं गर्भगृह से बाहर आकर 'बड़ा दांडा' (मुख्य मार्ग) पर हर जाति और वर्ग के भक्तों को दर्शन देते हैं।

  • अणसर (भगवान का बीमार होना): रथ यात्रा से ठीक पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा को 108 घड़ों के पवित्र जल से स्नान करने के बाद भगवान बीमार पड़ जाते हैं। वे 14-15 दिनों तक एकांतवास (अणसर घर) में विश्राम करते हैं। स्वस्थ होने (नव यौवन दर्शन) के बाद ही वे यात्रा पर निकलते हैं।

  • पापों से मुक्ति: 'वामदेव संहिता' के अनुसार, जो व्यक्ति रथ पर सवार देवताओं के दर्शन कर लेता है, उसके समस्त पाप कट जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • देवी लक्ष्मी का रूठना और रसगुल्ले का भोग: भगवान इस यात्रा में अपनी पत्नी देवी लक्ष्मी को साथ नहीं ले जाते। वापसी (बहुदा यात्रा) के समय जब देवी लक्ष्मी रूठ जाती हैं, तो भगवान जगन्नाथ उन्हें मनाने के लिए रसगुल्ले का भोग लगाते हैं।

गौरवशाली और सदियों पुराना इतिहास

इस भव्य रथ यात्रा का वर्णन स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और पद्म पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, 12वीं शताब्दी में पूर्वी गंगा राजवंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंगा देव ने पुरी के इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण करवाया था, जिसके बाद से यह यात्रा अविरल जारी है।

हालांकि, इतिहास में ऐसे दौर भी आए जब बाहरी आक्रमणों के कारण इस पर संकट आया। इतिहासकारों के अनुसार, मुगल आक्रमणों के कारण साल 1558 से 1735 के बीच करीब 32 बार इस रथ यात्रा का आयोजन नहीं किया जा सका था।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस बार प्रशासनिक समन्वय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है ताकि पिछले वर्षों की कमियों को दूर कर श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित और सुगम 'नीलाद्रि बिजे' तक का सफर सुनिश्चित किया जा सके।