Movie prime
PMC_Hospital

Guru Purnima 2026: 'गुरु बिन ज्ञान न होय'; काशी समेत देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व

गुरु के चरणों में नतमस्तक हुए शिष्य: आश्रमों, मंदिरों और विद्यालयों में उमड़ा आस्था का जनसैलाब; संतों ने कहा- "गुरु ही उतारते हैं भवसागर से पार"

Ad

 
ds
WhatsApp Group Join Now

Ad

वाराणसी (भदैनी मिरर)। सनातन धर्म के सबसे बड़े और पवित्र पर्वों में से एक 'गुरु पूर्णिमा' आज धर्मनगरी काशी सहित पूरे देश और दुनिया में अपार श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। प्रातः काल से ही गंगा घाटों, धार्मिक आश्रमों, मंदिरों और शिक्षण संस्थानों में गुरुजनों के दर्शन व पूजन के लिए श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। शिष्य अपने गुरुओं के श्रीचरणों में वंदन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं और जीवन को सही दिशा में ले जाने का संकल्प ले रहे हैं।

Ad
Ad

"गुरु बिना जीवन अपूर्ण, वही उतारते हैं भवसागर पार"

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर संतों और धर्माचार्यों ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी मनुष्य के जीवन में गुरु के बिना कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो सकता। गुरु ही वह दिव्य प्रकाश हैं जो शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर संसार रूपी भवसागर से पार उतारते हैं।

Ad

उन्होंने कहा कि जो शिष्य आज के पावन दिन अपने गुरु को धारण कर उनका पूजन-अर्चन करता है और उनका आशीर्वाद मांगता है, वह गुरु कृपा से न केवल अपना बल्कि पूरे समाज का कल्याण और मार्गदर्शन करता है।

wds

सनातन संस्कृति ने हमेशा दिया एकता का संदेश

धर्माचार्यों ने यह भी रेखांकित किया कि गुरु पूर्णिमा का यह महापर्व केवल सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए एक जीता-जागता उदाहरण है। हमारी सनातन परंपरा ने हमेशा से ही पूरे विश्व को एकजुटता, शांति और भाईचारे का संदेश दिया है। गुरु के चरणों में आकर ऊंच-नीच और भेदभाव का भाव समाप्त हो जाता है और पूरा समाज एक सूत्र में बंधता है।

Ad

शिक्षण संस्थानों में दिखा आदर व सम्मान का अनूठा दृश्य

धार्मिक स्थलों के साथ-साथ विद्यालयों और महाविद्यालयों में भी गुरु पूर्णिमा की अभूतपूर्व छटा देखने को मिली। नन्हे-मुन्ने बच्चों से लेकर युवाओं ने अपने शिक्षकों व गुरुजनों का माल्यार्पण, तिलक और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आधुनिकता के इस दौर में भी बच्चों के मन में अपने गुरुओं के प्रति वही अगाध श्रद्धा और आदर देखने को मिला, जो भारतीय संस्कृति की सबसे प्रमुख पहचान रही है।

सफलता, विवेक और खुशहाली का पर्व

गुरु पूर्णिमा का यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, संस्कार और जीवन मूल्यों के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है। यह महापर्व हमें स्मरण कराता है कि जीवन में वास्तविक सफलता, सही दिशा और विवेक केवल और केवल गुरु के कुशल मार्गदर्शन से ही संभव है। पर्व के अवसर पर सभी के प्रसन्न, एकजुट और सुखी रहने की मंगलकामनाएं की गईं।