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Ganesh Chaturthi 2026: गणेश स्थापना दोपहर में ही क्यों होती है? जानें सही मुहूर्त, पूजा विधि और नियम

14 सितंबर को मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी; ब्रह्म मुहूर्त नहीं, 'मध्याह्न काल' में ही क्यों विराजते हैं गणपति? समझें पौराणिक रहस्य

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भदैनी मिरर अध्यात्म डेस्क: यदि आप इस वर्ष अपने घर बाप्पा को लाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सुबह-सुबह अलार्म लगाकर हड़बड़ी करने की जरूरत नहीं है। आमतौर पर किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा-पाठ के लिए सुबह (ब्रह्म मुहूर्त) का समय उत्तम माना जाता है, लेकिन श्री गणेश स्थापना का नियम इससे बिल्कुल अलग है। गणपति की मूर्ति स्थापना और मुख्य पूजा भोर में नहीं, बल्कि दोपहर (मध्याह्न काल) में की जाती है।

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वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन मूर्ति स्थापना का 'मध्याह्न मुहूर्त' नई दिल्ली के समय अनुसार लगभग सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। (मुंबई में यह समय सुबह 11:20 से दोपहर 1:48 और चेन्नई में सुबह 10:51 से दोपहर 1:18 बजे तक रहेगा)। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

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दोपहर में ही क्यों होती है गणेश स्थापना?

हिंदू काल-गणना के अनुसार दिन के समय को पांच भागों में बांटा गया है—प्रातःकाल, संगव, मध्याह्न, अपराह्न और सायाह्न। पौराणिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म 'मध्याह्न काल' (दोपहर के समय) में हुआ था। यही कारण है कि शास्त्रीय नियमों के तहत बाप्पा की स्थापना और शोडषोपचार पूजा दोपहर के समय ही की जानी चाहिए।

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पूजा में ध्यान रखने योग्य मुख्य बातें:

  • दूर्वा की सही संख्या: पूजा में 21 दूर्वा (तीन पत्तियों वाली घास) चढ़ाने का विशेष महत्व है। इसे बिना गिने अंदाजे से न चढ़ाएं।

  • तुलसी पूरी तरह वर्जित: गणेश जी की पूजा की थाली में कभी भी तुलसी पत्र न रखें। गणेश पुराण की कथा के अनुसार, तुलसी जी द्वारा विवाह प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद दोनों ने एक-दूसरे को श्राप दिया था, तब से गणेश पूजन में तुलसी वर्जित है।

  • नैवेद्य और मोदक: बाप्पा के भोग के लिए 21 मोदक या बेसन/मोतीचूर के लड्डू सबसे उत्तम हैं। सफेद माखन और मिश्री का भोग भगवान श्रीकृष्ण के लिए होता है, इसे गणेश पूजा में न रखें।

  • मिट्टी की मूर्ति को प्राथमिकता: प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों के बजाय इको-फ्रेंडली या शादू मिट्टी की मूर्ति ही स्थापित करें, जिससे विसर्जन के समय जल प्रदूषण न हो।

इस दिन चंद्र दर्शन क्यों है वर्जित?

14 सितंबर को रात के समय चंद्रमा देखने से बचें। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्र देव ने गणेश जी के रूप का उपहास उड़ाया था, जिस पर गणेश जी ने उन्हें श्राप दिया था कि जो भी इस दिन चंद्रमा के दर्शन करेगा, उस पर 'मिथ्या दोष' (झूठा कलंक) लगेगा।

नई दिल्ली में 14 सितंबर को चंद्र दर्शन से बचने का समय सुबह 9:06 बजे से रात 8:04 बजे तक रहेगा। यदि भूलवश चंद्रमा पर नज़र पड़ जाए, तो पौराणिक 'स्यमन्तक मणिरत्न' वाले श्लोक का पाठ करके इसके दोष को दूर किया जा सकता है।

नोट: इस वर्ष गणेशोत्सव का समापन और मूर्ति विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को होगा।