Chardham Yatra 2026: आज से चारधाम यात्रा का शंखनाद; गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट खुले, जानें केदारनाथ-बदरीनाथ की तिथि और नए नियम
रील बनाने पर पाबंदी और पंचगव्य अनिवार्य; श्रद्धालुओं के लिए इस बार बदले गए हैं यात्रा के कई नियम
देहरादून/ऋषिकेश। आस्था और विश्वास का प्रतीक चारधाम यात्रा 2026 का आज अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर भव्य शुभारंभ हो गया है। पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच आज गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोल दिए गए हैं। यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने इस बार कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिनका पालन करना हर श्रद्धालु के लिए अनिवार्य होगा।


कपाट खुलने का शुभ समय
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गंगोत्री धाम: आज दोपहर 12:15 बजे कपाट खुले।
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यमुनोत्री धाम: दोपहर 12:35 बजे श्रद्धालुओं के लिए द्वार खोले गए।
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केदारनाथ धाम: 22 अप्रैल को सुबह 8:00 बजे कपाट खुलेंगे।
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बदरीनाथ धाम: 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे विधि-विधान से कपाट खुलेंगे।
यात्रा के नए और सख्त नियम: रील बनाने पर 'नो एंट्री'
प्रशासन ने धामों की मर्यादा बनाए रखने के लिए इस बार रील (Reels) बनाने वालों पर शिकंजा कसा है।
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70 मीटर का दायरा: मंदिर के 70 मीटर के दायरे में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और रील बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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मोबाइल लॉकर: श्रद्धालुओं के मोबाइल और कैमरे सुरक्षित रखने के लिए लॉकर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
पंचगव्य ग्रहण करना अनिवार्य
इस बार गंगोत्री और यमुनोत्री धाम आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का मिश्रण) ग्रहण करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम आध्यात्मिक शुद्धि और परंपराओं के संरक्षण के लिए उठाया गया है।

दर्शन की सीमा खत्म, टोकन सिस्टम शुरू
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने प्रतिदिन दर्शन करने की अधिकतम सीमा (Daily Limit) को समाप्त कर दिया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए:
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टोकन सिस्टम: दर्शन के लिए टोकन दिए जाएंगे ताकि कतारों में अनावश्यक भीड़ न हो।
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हेड काउंट कैमरे: एआई-पावर्ड कैमरों के जरिए भीड़ की निगरानी की जाएगी।
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कमांड सेंटर: केदारनाथ मार्ग पर गौरीकुंड से मंदिर तक 360-डिग्री कैमरों वाला हाई-टेक कंट्रोल सेंटर बनाया गया है।
गैर-सनातनियों के प्रवेश पर पाबंदी
यात्रा की एसओपी (SOP) में स्पष्ट किया गया है कि धामों की पवित्रता बनाए रखने के लिए गैर-सनातनियों के प्रवेश पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि केवल नियम सम्मत लोग ही मंदिर परिसर के भीतर प्रवेश करें।a

