Chandra Grahan 2026: मोक्ष के बाद गंगा स्नान को उमड़े श्रद्धालु, ग्रहण में जपते रहे हरिनाम
खंडग्रास चंद्रग्रहण के स्पर्श से मोक्ष तक चलता रहा हरिनाम संकीर्तन, दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर दान-पुण्य; सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, जल पुलिस रही मुस्तैद
Mar 3, 2026, 20:27 IST
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वाराणसी, Bhadaini Mirror।
खंडग्रास चंद्रग्रहण के अवसर पर मंगलवार को काशी के गंगा घाटों पर आस्था का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। ग्रहण के स्पर्श से लेकर मोक्ष काल तक हरिनाम जप, संकीर्तन और साधना का क्रम चलता रहा।


दोपहर 03:20 बजे ग्रहण का स्पर्श होने से पहले ही श्रद्धालु गंगा में कमर तक जल में खड़े होकर गुरु मंत्र का जाप करते दिखे। कई श्रद्धालुओं ने स्पर्श काल में डुबकी लगाने के बाद घाट की सीढ़ियों पर ध्यान-साधना की, जबकि मध्य और मोक्ष काल में पुनः स्नान किया।

दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर उमड़ी भीड़
दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ देखी गई। ग्रहण काल में दान-पुण्य की मान्यता के चलते बड़ी संख्या में जरूरतमंद और भिक्षुक घाटों के आसपास जुटे रहे। ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने दोपहर की गंगा आरती के बाद ही अपने लिए स्थान सुरक्षित कर लिया था।

ग्रहण के दौरान लोगों ने घरों में भी उपवास रखा। खाने-पीने की वस्तुओं की शुद्धता के लिए उनमें कुश या तुलसी डालने की परंपरा का पालन किया गया।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, जल पुलिस रही सतर्क
ग्रहण के मद्देनजर घाटों पर पुलिस और जल पुलिस की विशेष तैनाती की गई थी। जल पुलिस के जवान घाट किनारे बंधी नौकाओं पर मुस्तैद रहे और श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकते रहे। प्रमुख घाटों पर पानी के भीतर बांस लगाकर बैरिकेडिंग की गई थी ताकि कोई दुर्घटना न हो।
शंकराचार्य घाट पर शहनाई वादन
केदारघाट और हरिश्चंद्र घाट के बीच स्थित शंकराचार्य घाट पर ग्रहणकाल के दौरान आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। पंडित महेंद्र प्रसन्ना ने शहनाई वादन के माध्यम से प्रभु का सुमिरन किया। ग्रहण काल में भजन और मंत्रजाप की मान्यता के अनुरूप शहनाई की स्वर लहरियां गूंजती रहीं।
बंद रहे मंदिरों के कपाट, मोक्ष के बाद शुरु हुआ दर्शन
खंडग्रास चंद्रग्रहण के कारण मंगलवार सुबह ही काशी के प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, संकटमोचन हनुमान मंदिर, कालभैरव मंदिर और दुर्गा मंदिर समेत अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन रोक दिया गया था।
संकटमोचन मंदिर के कपाट प्रातः आरती के बाद सुबह 9 बजे बंद कर दिए गए थे। ग्रहण के मोक्ष के बाद शाम 7 बजे मंदिरों में विधिवत शुद्धिकरण और पूजन के पश्चात दर्शन का क्रम शुरू हुआ। संध्या आरती और रात्रि शयन आरती नियमानुसार संपन्न कराई गई।
ग्रहण काल में श्रद्धालु घरों और घाटों पर कीर्तन, मंत्रजाप और साधना में लीन रहे। काशी में एक बार फिर आस्था, परंपरा और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला।
