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काशीपुराधिपति का हुआ तिलकोत्सव, शीतलाधाम के लिंगिया महाराज ने पहली बार चढ़ाया तिलक

महंत आवास पर काशी की लोकपरंपरा अनुसार हुआ बाबा का तिलक, रंगभरी एकादशी तक चलेंगे विवाहोत्सव से जुड़े मांगलिक अनुष्ठान

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वाराणसी, भदैनी मिरर। देवाधिदेव महादेव की अविनाशी नगरी काशी में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर सदियों पुरानी लोकपरंपरा के अनुसार काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। टेढ़ीनीम स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल प्रतिमा का विधि-विधानपूर्वक तिलक किया गया।

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काशी की परंपरा में बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि बाबा विश्वनाथ के विवाहोत्सव से जुड़े मांगलिक अनुष्ठानों की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। इस तिलकोत्सव के माध्यम से काशीवासी लोकाचार के रूप में बाबा के सगुन में सहभागी बनते हैं, जहां देवता और भक्त के बीच पारिवारिक भाव का सजीव दर्शन होता है।

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पहली बार शीतलाधाम के लिंगिया महाराज ने चढ़ाया बाबा का तिलक

इस वर्ष दशाश्वमेध स्थित सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता मंदिर के श्रीमहंत शिवप्रसाद पाण्डेय ‘लिंगिया महाराज’ ने पहली बार बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव चढ़ाया। यह अवसर काशी की धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व का रहा, क्योंकि शीतलाधाम महंत परिवार की ओर से यह पहला लोकाचार था।

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बांसफाटक स्थित श्रीयंत्र पीठ से श्रीमहंत लिंगिया महाराज के नेतृत्व में भव्य तिलक यात्रा निकाली गई। यात्रा में 21 वैदिक बटुकों द्वारा मंत्रोच्चार किया गया। शहनाई की मधुर धुन, डमरूओं के निनाद और शंखध्वनि के बीच 51 थालों में सजा तिलक चढ़ावा और 56 भोग की थालियां लेकर काशीवासी ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष के साथ महंत आवास पहुंचे।

डमरू-शंख की ध्वनि से भक्तिमय हुआ टेढ़ीनीम क्षेत्र

डमरूओं के नाद और गगनभेदी हर हर महादेव के जयघोष से पूरा टेढ़ीनीम क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। गलियों से गुजरती तिलक यात्रा को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यह दृश्य काशी की जीवंत लोकपरंपरा का अनुपम उदाहरण बना।


चारों वेदों के विद्वानों ने कराया विशेष पूजन

महंत आवास पर तिलकोत्सव से पूर्व परिवार की वरिष्ठ सदस्य मोहिनी देवी के सानिध्य में अंकशास्त्री महंत वाचस्पति तिवारी द्वारा विशेष वैदिक पूजन संपन्न कराया गया।
आचार्य सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के विद्वानों ने मंत्रोच्चार के साथ बाबा की पंचबदन चल प्रतिमा का पूजन किया। वैदिक मंत्रों की गूंज से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

भोग आरती के बाद हुआ बाबा का राजसी श्रृंगार

दोपहर भोग आरती के उपरांत संजीव रत्न मिश्र (भानू मिश्र) द्वारा बाबा विश्वनाथ का परंपरागत भव्य राजसी श्रृंगार किया गया। पंचबदन प्रतिमा को विशेष वस्त्रों, आभूषणों और पुष्पों से सुसज्जित किया गया, जिससे बाबा का स्वरूप अत्यंत दिव्य प्रतीत हुआ।

लोकाचार में सहभागी बना पूरा काशी समाज

महंत आवास पर काशीवासी तिलकहरुओं का स्वागत मनोज शर्मा ने किया। इसके बाद महंत वाचस्पति तिवारी और श्रीमहंत लिंगिया महाराज के मध्य विधिवत लोकाचार संपन्न हुआ।
56 भोग अर्पित किए गए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आरती की गई।

काशी की आत्मा है यह लोकपरंपरा : लिंगिया महाराज

श्रीमहंत लिंगिया महाराज ने कहा कि बसंत पंचमी काशी में केवल पर्व नहीं, बल्कि बाबा विश्वनाथ के सगुन और विवाहोत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। टेढ़ीनीम महंत आवास पर होने वाला यह तिलकोत्सव सनातन आस्था, पौराणिक मान्यताओं और काशी की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि इस लोकाचार में मंदिरों, महंत परिवारों के साथ-साथ सामान्य काशीवासी भी पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ सहभागी बनते हैं, यही काशी की आत्मा है।

रंगभरी एकादशी तक चलेंगे मांगलिक अनुष्ठान

बसंत पंचमी से प्रारंभ हुए यह मांगलिक अनुष्ठान रंगभरी एकादशी तक चलते रहेंगे। इस दौरान बाबा विश्वनाथ और माता गौरा से जुड़ी अनेक लोकपरंपराएं निभाई जाएंगी, जो काशी की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखती हैं।

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