Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर बन रहा है दुर्लभ 'मालव्य राजयोग', जानें खरीदारी का महामुहूर्त और शुभ चौघड़िया
क्यों इस बार की अक्षय तृतीया है बेहद खास और कब है राहुकाल?
वाराणसी। सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व इस वर्ष 19 अप्रैल 2026 (रविवार) को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। भदैनी मिरर से खास बातचीत में प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पं. दिवाकर त्रिपाठी 'पूर्वांचली' ने बताया कि इस वर्ष अक्षय तृतीया पर ग्रहों की स्थिति अत्यंत प्रभावशाली है, जो जातकों को अक्षय पुण्य प्रदान करने वाली है।


शुभ योगों का अनूठा संगम पं. दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, इस वर्ष तृतीया तिथि में आयुष्मान और सौभाग्य योग का संयोग बन रहा है। साथ ही, ग्रहों के राजा सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृष में गोचर करेंगे। विशेष बात यह है कि चंद्रमा और शुक्र की युति से 'मालव्य' नामक पंचमहापुरुष राजयोग का निर्माण हो रहा है, जो सुख-समृद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

तिथि और नक्षत्र का समय
-
तृतीया तिथि आरंभ: 19 अप्रैल, दोपहर 1:01 बजे से।
-
तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल, सुबह 10:40 बजे तक।
-
भगवान परशुराम जयंती: 19 अप्रैल को प्रदोष काल में मनाई जाएगी।
-
नक्षत्र: 19 अप्रैल को कृतिका नक्षत्र सुबह 9:11 से शुरू होकर अगले दिन सुबह 7:36 तक रहेगा, जिसके बाद रोहिणी नक्षत्र लगेगा।
खरीदारी के लिए 'स्थिर लग्न' और शुभ मुहूर्त ज्योतिष शास्त्र में स्थिर लग्न में की गई खरीदारी (विशेषकर सोना, चांदी, वाहन या भूमि) लंबे समय तक लाभ देती है:
-
सिंह लग्न (स्थिर): दोपहर 1:34 से 3:38 बजे तक।
-
वृश्चिक लग्न (स्थिर): रात 8:18 से 10:25 बजे तक।
-
कुम्भ लग्न (स्थिर): मध्यरात्रि 2:24 से 3:45 बजे तक।
-
वृष लग्न (स्थिर): 20 अप्रैल की सुबह 7:00 से 8:52 बजे तक।
शुभ चौघड़िया का समय (19 अप्रैल):
-
दोपहर: 1:30 से 3:00 बजे तक।
-
शाम: 6:21 से रात्रि 10:25 बजे तक।
-
मध्यरात्रि: 1:30 से 3:00 बजे तक।
सावधानी: राहुकाल में न करें खरीदारी पं. पूर्वांचली ने सचेत किया कि राहुकाल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। 19 अप्रैल को शाम 4:30 से 6:00 बजे के बीच राहुकाल रहेगा, इस दौरान खरीदारी या नए कार्य की शुरुआत करने से बचें।

