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12 अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण: समय, सूतक काल और भारत में प्रभाव

क्या भारत में दिखेगा यह सूर्य ग्रहण?, सूतक काल कहां मान्य होगा?

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Surya grahan
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12 अगस्त को साल का सबसे खास और दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यूरोप समेत कई प्रमुख देशों के लिए यह खगोलीय घटना बेहद ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि वर्ष 1999 के बाद वहां के लोग पहली बार ऐसा पूर्ण सूर्य ग्रहण देखेंगे। ग्रहण के दौरान लगभग 2 मिनट के लिए दिन में ही अंधेरा छा जाएगा, तापमान में गिरावट आएगी और दिन के समय रात जैसा नजारा देखने को मिलेगा।

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अगर आप इस ग्रहण को प्रत्यक्ष रूप से देखने वाले क्षेत्रों में हैं, तो इसे नग्न आंखों से देखने के बजाय विशेष प्रकार के सोलर फिल्टर/ग्लासेज का इस्तेमाल जरूर करें।

सूर्य ग्रहण का भारत में समय (Surya Grahan Timing in India)

भारतीय समय (IST) के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण रात के समय लगेगा:

  • ग्रहण का प्रारंभ: 12 अगस्त, रात 09:04 बजे

  • ग्रहण का मध्यकाल: रात 11:16 बजे

  • ग्रहण की समाप्ति: 12 अगस्त की देर रात (13 अगस्त तड़के) 01:28 बजे

क्या भारत में दिखेगा यह सूर्य ग्रहण?

भारतीय समयानुसार यह ग्रहण रात के समय लगेगा, इसलिए भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा

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सूतक काल कहां मान्य होगा?

शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले लग जाता है। लेकिन जिस क्षेत्र में ग्रहण दृश्यमान नहीं होता, वहां सूतक काल के नियम लागू नहीं होते हैं।

  • भारत में स्थिति: भारत में दिखाई न देने के कारण यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और सामान्य पूजा-पाठ जारी रहेगा।

  • विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए: अमेरिका, कनाडा, स्पेन, और यूरोप के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए सूतक काल मान्य रहेगा। वे ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले सूतक के नियमों का पालन करें।

सूतक काल के दौरान सावधानियां और उपाय:

  1. खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते (तुलसीदल) डालकर रखें, जिससे वे दूषित न हों।

  2. सूतक और ग्रहण काल के दौरान मूर्तियों का स्पर्श न करें, केवल मानसिक जाप करें।

  3. गर्भवती महिलाएं घर के अंदर रहें और भगवान के नाम या मंत्रों का स्मरण करें।

  4. ग्रहण की समाप्ति के पश्चात दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।

किन देशों में दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण?

  • पूर्ण और वलयाकार रूप: ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, कनाडा, अटलांटिक महासागर, आर्कटिक और रूस के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में।

  • आंशिक रूप: फ्रांस, ब्रिटेन और यूरोप के अधिकांश अन्य देशों में।

राशियों पर ज्योतिषीय प्रभाव

ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार, भले ही यह ग्रहण भारत में दिखाई न दे, लेकिन सूर्य ग्रह के कारकत्व (ऊर्जा, आत्मा और मान-सम्मान) के कारण इसका ज्योतिषीय प्रभाव सभी राशियों पर लगभग एक महीने तक रहेगा।

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यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लग रहा है। ग्रहण के प्रतिकूल प्रभाव से बचने और मानसिक शांति के लिए भगवान विष्णु या सूर्य देव के मंत्रों (जैसे आदित्य हृदय स्तोत्र या ॐ घृणिः सूर्याय नमः) का जाप करना श्रेयस्कर रहेगा।