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West Bengal Election: भवानीपुर में भारी बवाल, शुभेंदु अधिकारी के सामने लगे 'जय बांग्ला' के नारे; TMC और BJP कार्यकर्ताओं में झड़प

'जय श्री राम' vs 'जय बांग्ला': वोटिंग के दौरान भवानीपुर बना जंग का मैदान, पुलिस ने बेकाबू भीड़ पर किया लाठीचार्ज

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और निर्णायक चरण की वोटिंग के दौरान भवानीपुर विधानसभा सीट हॉटस्पॉट बन गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस गढ़ में बीजेपी प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी के पहुँचते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। यहाँ 'जय श्री राम' और 'जय बांग्ला' के नारों के बीच बीजेपी और टीएमसी के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा।

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नारेबाजी से शुरू हुआ विवाद

मामला तब बिगड़ा जब शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर के एक मतदान केंद्र का जायजा लेने पहुँचे। बीजेपी समर्थकों ने 'जय श्री राम' के नारे लगाने शुरू किए, जिसके जवाब में वहाँ मौजूद टीएमसी कार्यकर्ताओं ने 'जय बांग्ला' के नारे बुलंद कर दिए। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

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शुभेंदु अधिकारी का बड़ा आरोप: 'ये वोटर नहीं, बांग्लादेशी हैं'

झड़प के बाद शुभेंदु अधिकारी ने सुरक्षा बलों से शिकायत की कि बूथ के बाहर जमा भीड़ असली मतदाता नहीं बल्कि 'बाहरी' और 'बांग्लादेशी' घुसपैठिये हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं यहाँ मतदान की स्थिति देखने आया था, लेकिन टीएमसी ने यहाँ बाहरी लोगों को जमा कर रखा है।" उन्होंने बताया कि इस घटना को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भूपेंद्र यादव ने उनसे फोन पर बात की है और बीजेपी इस मामले में चुनाव आयोग से कड़ी कार्रवाई की मांग करेगी।

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पुलिस ने किया बल प्रयोग

हालात बिगड़ते देख कोलकाता पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। कोलकाता पुलिस के एडिशनल CP ने पुष्टि की कि शुभेंदु अधिकारी के बूथ में प्रवेश करते ही नारेबाजी शुरू हुई थी, जिसे समय रहते काबू कर लिया गया।

नारों की जंग: अस्मिता बनाम ध्रुवीकरण

बंगाल की राजनीति में 'जय श्री राम' और 'जय बांग्ला' अब महज नारे नहीं, बल्कि वैचारिक युद्ध के प्रतीक बन चुके हैं। जहाँ बीजेपी 'जय श्री राम' के जरिए हिंदू ध्रुवीकरण की कोशिश में है, वहीं ममता बनर्जी 'जय बांग्ला' के जरिए बंगाली अस्मिता और क्षेत्रीय गौरव का कार्ड खेल रही हैं। ममता बनर्जी ने भाजपा को "बाहरी" पार्टी करार देने के लिए इस नारे को ढाल बनाया है।