वाराणसी: दालमंडी जाने से सपा नेताओं को रोका, जिलाध्यक्ष सहित सभी बड़े नेताओं को पुलिस ने किया हॉउस अरेस्ट
दालमंडी प्रकरण में पीड़ितों से मिलने जा रही समाजवादी पार्टी की टीम को प्रशासन ने रोका; सपा ने बताया लोकतंत्र की हत्या, 21 फरवरी 2026 को प्रतिनिधिमंडल भेजने की घोषणा
वाराणसी। दालमंडी प्रकरण को लेकर वाराणसी में शनिवार को राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई, जब प्रशासन ने समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं और पदाधिकारियों को दालमंडी क्षेत्र में जाने से रोक दिया। सुबह से ही पुलिस ने कई सपा नेताओं को उनके आवासों पर नजरबंद कर दिया।


दालमंडी में पीड़ित परिवारों, भवन स्वामियों और व्यापारियों से मुलाकात के लिए जा रहे सपा नेता समद अंसारी को रास्ते में रोककर हाउस अरेस्ट कर लिया गया। वहीं पार्टी के जिलाध्यक्ष सुजीत यादव (लक्कड़ पहलवान) को अर्दली बाजार स्थित पार्टी कार्यालय में पुलिस अभिरक्षा में रखा गया।


पूर्व प्रत्याशी को भी रोका गया
दोपहर में सपा की पूर्व विधायक प्रत्याशी पूजा यादव दालमंडी के पीड़ित परिवार से मिलने जा रही थीं, लेकिन चौक पुलिस ने उन्हें दालमंडी मोड़ पर रोककर थाने ले गई। प्रशासन ने दालमंडी क्षेत्र में किसी भी राजनीतिक गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात से ही पुलिस ने सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट करना शुरू कर दिया था। सुबह सात बजे से कई पदाधिकारियों के घरों के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
राजातालाब थाना प्रभारी दयाराम पुलिस बल के साथ बीरभानपुर स्थित पूर्व राज्य मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल के आवास पर पहुंचे और उन्हें भी दालमंडी जाने से रोकते हुए हाउस अरेस्ट कर लिया।


सपा ने बताया लोकतंत्र की हत्या
जिलाध्यक्ष सुजीत यादव ने प्रशासनिक कार्रवाई को लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि सपा की टीम दालमंडी प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav को सौंपने वाली थी, लेकिन हर बार पुलिस बल के जरिए उन्हें रोका जा रहा है।
सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन एकतरफा कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है तो विपक्ष को पीड़ितों से मिलने से क्यों रोका जा रहा है।

राजनीतिक माहौल गरमाया
इस घटनाक्रम के बाद वाराणसी में राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध की चेतावनी देते हुए कहा कि वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े रहेंगे। पार्टी की ओर से 21 फरवरी 2026 को एक प्रतिनिधिमंडल दालमंडी भेजने की घोषणा की गई थी।
दालमंडी प्रकरण अब केवल स्थानीय व्यापारियों और मकान मालिकों का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह शहर की राजनीति में बड़ा विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इसको लेकर सियासी गतिविधियां और तेज होने के संकेत हैं।
