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TMC को लगा बहुत बड़ा झटका! वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी और राज्यसभा से दिया इस्तीफा, बोले— 'नेताओं के सिर चढ़ गया था सत्ता का नशा'

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में हार और आरजी कर (RG Kar) कांड को लेकर नाराज चल रहे सुखेंदु शेखर ने टीएमसी से तोड़ा नाता, पार्टी में बड़ी बगावत के संकेत।

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पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी अंदरूनी कलह के बीच सोमवार (8 जून, 2026) को पार्टी को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। टीएमसी के सबसे वरिष्ठ और प्रखर नेताओं में से एक, राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) की सदस्यता भी छोड़ दी है।

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सुखेंदु शेखर राय ने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए 77 वर्षीय दिग्गज नेता ने टीएमसी नेतृत्व पर तीखे हमले किए और पार्टी के भीतर चल रही तानाशाही को इस इस्तीफे की वजह बताया।

"नेताओं के सिर पर सत्ता का नशा चढ़ गया था"

इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा:

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"सत्ता इन लोगों (TMC नेताओं) के सिर पर इस कदर चढ़ गई थी कि उन्हें लगने लगा था कि दुनिया में कोई उन्हें छू भी नहीं सकता। लेकिन जिन लोगों ने उन्हें चुनकर वहां भेजा था, उन्हीं लोगों ने आज उन्हें नीचे गिरा दिया है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को मिली करारी हार के बाद भी टीएमसी के भीतर कोई आत्ममंथन (Introspection) नहीं हुआ। राय ने कहा कि पार्टी में भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों और राजनीतिक-सामाजिक विषयों पर चर्चा करने के लिए कोई मंच ही नहीं बचा था।

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RG Kar कांड बना टर्निंग पॉइंट (Turning Point)

सुखेंदु शेखर राय पिछले काफी समय से पार्टी लाइन से अलग चल रहे थे। उन्होंने खुलासा किया कि आरजी कर अस्पताल में हुए डॉक्टर बलात्कार-हत्याकांड के बाद से ही उन्होंने मानसिक रूप से पार्टी छोड़ने का मन बना लिया था।

  • पार्टी में किया गया अलग-थलग: राय ने कहा, "आरजी कर घटना के बाद जब आम जनता, डॉक्टर और ऐसे लोग जो कभी राजनीति में नहीं रहे, सड़कों पर उतर आए, तब भी पार्टी नेताओं ने इस पर कोई चर्चा नहीं की। मैंने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी, जिसके बाद से मुझे पार्टी में लगातार अलग-थलग कर दिया गया।"

  • सबूत मिटाने के आरोप: उन्होंने आगे कहा, "मेरा एकमात्र कसूर यह था कि मैंने कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आंतरिक जांच की मांग की थी, क्योंकि मेरा मानना था कि सबूतों को नष्ट करने में उनकी बड़ी भूमिका थी। लेकिन उस समय दोषियों को बचाने के प्रयास किए जा रहे थे। वही मेरे लिए टर्निंग पॉइंट था।"

TMC में बड़ी बगावत: कई और सांसद छोड़ सकते हैं पार्टी?

सुखेंदु शेखर राय के इस इस्तीफे ने टीएमसी सांसदों के बीच गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चाएं तेज हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी सुखेंदु शेखर की राह पकड़ सकते हैं। यहाँ तक कि हाल ही में चुने गए एक नए राज्यसभा सांसद के भी पार्टी छोड़ने की अटकलें हैं।

पार्टी न सिर्फ संसद में बल्कि बंगाल विधानसभा के भीतर भी बड़ी बगावत का सामना कर रही है। टीएमसी विधायक दल में फूट पड़ चुकी है और करीब 60 विधायकों ने मिलकर अपना एक नया 'नेता प्रतिपक्ष' (Leader of Opposition) चुन लिया है। सुखेंदु शेखर ने इस पर कहा कि विधायकों को भी शायद अब भरोसा नहीं रह गया था कि पार्टी सही दिशा में चल रही है।