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सपा का 'गौ-पूजन' प्रदर्शन: भाजपा के 'गौ-प्रेम' को मुस्लिम नेता ने बताया वोट बैंक की राजनीति, प्रदर्शन कर बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग

वाराणसी में सड़कों पर 'गौमाता' को लेकर उतरे सपा कार्यकर्ता: भाजपा के 'गौ-प्रेम' पर उठाए सवाल, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग

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वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ एक बेहद अनोखा और आक्रामक प्रदर्शन किया। सपा कार्यकर्ता केवल नारेबाजी करने नहीं, बल्कि खुद 'गौमाता' को अपने साथ लेकर सड़कों पर उतरे। कार्यकर्ताओं ने बाकायदा गायों की पूजा-अर्चना की, उन्हें आरती दिखाई और चारा खिलाकर केंद्र सरकार के सामने उन्हें 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने की पुरजोर मांग उठाई।

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इस अनूठे प्रदर्शन के जरिए समाजवादी पार्टी ने भाजपा के 'गौ-प्रेम' के दावों की हवा निकालते हुए उन पर आस्था के नाम पर केवल वोट बैंक की राजनीति करने का सीधा आरोप लगाया।

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"वोट बैंक भाजपा का, दुर्दशा गौमाता की" — जीशान अंसारी

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे युवा सपा नेता जीशान अंसारी ने सत्तापक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा के लिए गाय केवल चुनावी वैतरणी पार करने का एक जरिया मात्र है। उन्होंने कहा:

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"चुनाव आते ही भाजपा नेताओं को अचानक गाय याद आने लगती है, लेकिन चुनाव बीतते ही उन्हीं गौमाताओं को सड़कों पर लावारिस, भूखा और प्लास्टिक खाने के लिए मरने को छोड़ दिया जाता है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में सरकारी गौशालाएं केवल भारी भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह गई हैं। करोड़ों रुपये का बजट कागजों पर साफ हो रहा है, जबकि धरातल पर गायें भूख और गंभीर बीमारियों से दम तोड़ रही हैं।"

बीफ एक्सपोर्ट कंपनियों से चंदे का आरोप, शुभम सेठ बोले- 'उजागर हुआ दोहरा चरित्र'

केंद्र सरकार की व्यापारिक नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए सपा नेता शुभम सेठ गोलू ने बेहद गंभीर और राजनीतिक आरोप मढ़े। शुभम सेठ ने कहा:

"भाजपा का दोहरा चरित्र अब देश के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। एक तरफ ये लोग देश के भीतर गाय के नाम पर समाज को बांटने और नफरत फैलाने की राजनीति करते हैं, तो दूसरी तरफ इनके राज में भारत दुनिया के सबसे बड़े बीफ (मांस) निर्यातक देशों में शुमार है। बीफ एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों से 'चुनावी चंदा' लेने वाले लोग आज हमें धर्म और संस्कृति का पाठ पढ़ा रहे हैं। अगर भाजपा में रत्ती भर भी नैतिक सच्चाई है, तो वह तुरंत बीफ के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए।"

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आस्था ही नहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है पशुधन: प्रभाकर यादव

सपा नेता प्रभाकर यादव ने गाय की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि गाय का मुद्दा सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है। गाय का दूध जहां कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में मुख्य हथियार है, वहीं उसका गोबर और गोमूत्र आज के समय में जैविक खेती (Organic Farming) और किसानों की आय दोगुनी करने का सबसे बड़ा माध्यम हैं। ग्रामीण भारत की आर्थिक व्यवस्था पशुधन पर टिकी है, इसलिए गाय का संरक्षण असल में देश के किसान और गरीब का संरक्षण है।

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संसद में कानून बनाकर गाय को मिले 'राष्ट्रीय पशु' का दर्जा: अभिषेक झा

सपा नेता अभिषेक झा और आनंद यादव ने संयुक्त रूप से पार्टी की मुख्य मांगें शासन के सामने रखीं:

  1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तत्काल संसद में विशेष कानून पास कर गौमाता को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करें।

  2. देश से होने वाले हर प्रकार के बीफ (गौमांस) के निर्यात पर तत्काल और पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए।

  3. उत्तर प्रदेश की सभी सरकारी गौशालाओं के बजट और वहां हो रही गायों की मौतों की न्यायिक जांच कराई जाए।

सपा नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने 'गौमाता' की सुरक्षा और सम्मान को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए, तो समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन करेगी।

प्रदर्शन में ये प्रमुख सपा नेता रहे शामिल

वाराणसी की सड़कों पर हुए इस बड़े प्रदर्शन में मुख्य रूप से शिवेंद्र राय, जितेंद्र पटेल, संजय पटेल, प्रीतम यादव, अमित कुमार "विक्की", पुनीत मौर्य, राज श्रीवास्तव, जवाहर यादव, आरिफ खान, फरहान सिद्दीकी, धीरू चौबे, फहद सिद्दीकी, दाऊद खान, कैफ अहमद, सिद्धार्थ सोनकर और इमरान खान सहित सैकड़ों की संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।