Movie prime
PMC_Hospital

पंजाब में BJP-अकाली गठबंधन में नया पेंच: सुखबीर बादल को CM प्रत्याशी मानने से भाजपा का इनकार, सीट शेयरिंग पर भी मतभेद

70-47 सीट शेयरिंग फॉर्मूले और मुख्यमंत्री पद के चेहरे पर अड़ी बात; जानें दोनों दलों के बीच क्या हैं मुख्य मतभेद

Ad

 
Sukhbir singh
WhatsApp Group Join Now

Ad

Ad

भदैनी मिरर (पॉलिटिकल डेस्क): पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलें तेज हैं। सार्वजनिक रूप से बीजेपी भले ही राज्य की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का दावा कर रही हो, लेकिन अंदरखाने दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है। हालांकि, अब गठबंधन की राह में सबसे बड़ा रोड़ा मुख्यमंत्री (CM) पद का चेहरा और सीटों का बंटवारा बनता दिख रहा है।

Ad
Ad

CM फेस पर क्यों फंसा पेंच?

सूत्रों के मुताबिक, शिरोमणि अकाली दल की ओर से शर्त रखी जा रही है कि चुनाव से पहले सुखबीर सिंह बादल को गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया जाए। अकाली दल का तर्क है कि पंजाब की पंथिक और प्रांतीय राजनीति में उनकी जमीनी पकड़ के कारण उन्हें 'बड़े भाई' की भूमिका मिलनी चाहिए।

Ad

दूसरी ओर, बीजेपी का एक बड़ा धड़ा चुनाव से पहले किसी को भी सीएम फेस घोषित करने के मूड में नहीं है। बीजेपी नेताओं का मानना है कि पहले चुनाव परिणामों और सीटों की संख्या पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, उसके बाद ही सर्वसम्मति से नेतृत्व (मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री) का फैसला किया जाएगा।

Ad

Ad

सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर भी टकराव

पुराने गठबंधन के दौर में बीजेपी महज 23 शहरी/हिंदू बहुल सीटों पर चुनाव लड़ती थी, जबकि बाकी ग्रामीण व पंथिक सीटों पर अकाली दल मैदान में उतरता था। लेकिन इस बार परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं:

  • अकाली दल की मांग: चर्चा है कि अकाली दल 70 सीटों पर खुद लड़ने और 47 सीटें बीजेपी को देने का प्रस्ताव रख रहा है।

  • बीजेपी का रुख: भाजपा का एक वर्ग इस 70-47 के फॉर्मूले से सहमत नहीं है। बीजेपी का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में उनका संगठन काफी मजबूत हुआ है, इसलिए सीटों का बंटवारा लगभग बराबरी के स्तर पर होना चाहिए।

किस सीट पर कौन सा दल चुनाव लड़ेगा, इसको लेकर भी दोनों दलों के बीच सहमति बनना अभी बाकी है। देखना होगा कि चुनाव से पहले दोनों पुराने सहयोगी इन मतभेदों को सुलझाकर एक मंच पर आते हैं या अलग-अलग राह चुनते हैं।