बंगाल चुनाव में 'झालमुड़ी' पर महासंग्राम: पीएम मोदी के तंज पर ममता बनर्जी का पलटवार- "मिर्ची हमें नहीं, 4 मई को आपको लगेगी"
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026, पीएम मोदी झालमुड़ी वीडियो, ममता बनर्जी का पलटवार
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण का मतदान संपन्न होते ही राज्य की राजनीतिक फिजां और भी ज्यादा तीखी हो गई है। इस बार मुकाबला विकास के दावों के साथ-साथ 'झालमुड़ी' के तीखेपन तक पहुँच गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल हुए अपने 'झालमुड़ी ब्रेक' को लेकर टीएमसी पर कसे गए तंज के बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोर्चा खोल दिया है।


क्या था पीएम मोदी का 'मिर्ची' वाला तंज?
हाल ही में कृष्णानगर की एक जनसभा में पीएम मोदी ने अपने वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा था, "4 मई को बंगाल में भाजपा की जीत का जश्न मनेगा। मैंने झालमुड़ी खाई थी, लेकिन इसकी मिर्ची टीएमसी वालों को लग गई है।" पीएम के इस बयान ने बंगाल की चुनावी रैलियों में 'झाल' (तीखेपन) की चर्चा छेड़ दी थी।

ममता बनर्जी का तीखा पलटवार
पीएम मोदी के हमले का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे 'चुनावी ड्रामा' करार दिया। एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा:
"हमें झाल नहीं लगा, बल्कि 4 मई को जब चुनाव परिणाम आएंगे, तब प्रधानमंत्री को असली 'झाल' का अहसास होगा। उन्हें तब पता चलेगा कि जनता ने किसे चुना है।"
"स्क्रिप्टेड था पूरा घटनाक्रम" - ममता के गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने पीएम मोदी के झालमुड़ी खाने के वीडियो पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह नियोजित बताया। उन्होंने हमला बोलते हुए कहा कि:

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कैमरे की मौजूदगी: अगर यह अचानक लिया गया ब्रेक था, तो वहां पहले से हाई-क्वालिटी कैमरे कैसे मौजूद थे?
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10 रुपये का नोट: पीएम के पास सिर्फ 10 रुपये का नोट होना अविश्वसनीय लगता है।
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पुराना पैटर्न: ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आते ही पीएम कभी चायवाला बन जाते हैं, तो कभी गुफा में चले जाते हैं। यह सब वोट बटोरने की स्क्रिप्ट का हिस्सा है।
2026 का संग्राम और 'झालमुड़ी' की राजनीति
बंगाल चुनाव में अक्सर स्थानीय खान-पान और संस्कृति का बड़ा महत्व रहता है। जहाँ भाजपा 'झालमुड़ी' के जरिए आम आदमी से जुड़ने का संदेश दे रही है, वहीं टीएमसी इसे बाहरी बनाम भीतरी और ड्रामेबाजी की संज्ञा दे रही है।
अब देखना यह होगा कि 4 मई को जब चुनावी नतीजे घोषित होंगे, तो जीत की मिठाई का स्वाद किसे मिलता है और किसे चुनावी 'मिर्ची' का सामना करना पड़ता है।
