दिवाली से पहले मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की हलचल तेज: एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद बदले समीकरण
तीसरे कार्यकाल के ढाई साल बाद मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट; 10 से ज्यादा नए चेहरों की एंट्री संभव, 'एक व्यक्ति एक पद' का दिखेगा असर।
नई दिल्ली (भदैनी मिरर राष्ट्रीय डेस्क): केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के करीब ढाई साल पूरे होने के बाद अब केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बड़े पैमाने पर फेरबदल और विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं। मंगलवार को केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन के पद से इस्तीफे और तमिलनाडु में पार्टी संगठन के काम में जुटने के ऐलान के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा गरमा गई है कि दिवाली से पहले मोदी कैबिनेट में नया रूप देखने को मिल सकता है।

इस्तीफों और सांगठनिक बदलावों से खाली हुए कई पद
मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावनाओं को हालिया राजनीतिक और सांगठनिक घटनाक्रमों से बल मिल रहा है:
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मुरुगन, बिट्टू और कुरियन का इस्तीफा: एल. मुरुगन से पहले रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन ने भी राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने पर मंत्री पदों से इस्तीफा दिया था।
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सांसद नामांकन और 'एक व्यक्ति, एक पद': पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को दोबारा राज्यसभा के लिए नामांकित न किए जाने के कारण उनकी विदाई की संभावना जताई जा रही है। वहीं केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का नया अध्यक्ष बनाए जाने के बाद 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत उनकी जगह नया चेहरा लाया जा सकता है।
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शिक्षा मंत्रालय में बदलाव: हालिया घटनाक्रमों के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय में भी नए मंत्री की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
वर्तमान में लगभग 40 प्रतिशत मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालयों का अतिरिक्त प्रभार है, जिसे संतुलित करने के लिए कम से कम 10 नए मंत्रियों को शामिल किए जाने की उम्मीद है।
यूपी, उत्तराखंड और पंजाब चुनावों के समीकरणों पर जोर
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपने मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को प्राथमिकता देंगे।
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उत्तर प्रदेश: राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण यूपी से कुछ बड़े ओबीसी, दलित या क्षेत्रीय प्रभाव वाले चेहरों को मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
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पंजाब और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व: पंजाब चुनावों के मद्देनजर किसी वरिष्ठ सिख चेहरे तथा दक्षिण/पूर्वोत्तर के समीकरण साधने के लिए ईसाई समुदाय के नेता को भी स्थान दिया जा सकता है।
संसद के विशेष सत्र की भी सुगबुगाहट
प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में कई दौर की बैठकें कर मंत्रियों के कामकाज और विभागीय प्रगति की समीक्षा की है। चूंकि संसद के पिछले सत्र का सत्रावसान (prorogue) अभी तक नहीं किया गया है, इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी शीतकालीन सत्र से पहले फेरबदल के बाद सरकार संसद का एक विशेष सत्र भी बुला सकती है।
