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TMC में महा-बगावत! कभी ममता बनर्जी को 'भावी PM' बताने वालीं फायरब्रांड सांसद सायनी घोष भी होंगी बागी? NDA को समर्थन देने की तैयारी

बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में अब तक का सबसे बड़ा संकट; काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई वाले 20 बागी सांसदों के गुट से जुड़ीं जादवपुर की सांसद सायनी घोष।

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New Delhi

राजनीति में कुछ भी निश्चित नहीं होता, और जब राजनीतिक भविष्य धुंधला दिखाई देने लगे तो पासा पलटने में देर नहीं लगती। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सबसे मुखर आवाजों में से एक और जादवपुर से सांसद सायनी घोष को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, सायनी घोष अब टीएमसी के बागी खेमे में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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स्थापना के बाद से अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रही टीएमसी के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं है। हालांकि सायनी ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अपना रास्ता चुन लिया है।

काकोली घोष दस्तीदार के 'बागी गुट' से जुड़ीं सायनी!

विधानसभा चुनाव 2026 में टीएमसी को मिली करारी शिकस्त के ठीक एक महीने बाद, संसद में पार्टी के भीतर एक बड़ी बगावत देखने को मिल रही है।

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  • 20 सांसदों का बगावती पत्र: लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने की पेशकश की है।

  • दस्तावेजों पर किए हस्ताक्षर: खबरों के मुताबिक, सायनी घोष ने काकोली घोष से संपर्क किया है और बागी गुट के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर (Signatory) भी कर दिए हैं।

  • दिल्ली में डेरा: सायनी इस समय कोलकाता में नहीं हैं। माना जा रहा है कि वह दिल्ली में हैं, जहाँ सभी बागी सांसद डेरा डाले हुए हैं। इसके अलावा ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली एक और सांसद माला रॉय भी दिल्ली पहुँचकर बागी खेमे में शामिल हो चुकी हैं।

ममता की सबसे बड़ी समर्थक का यूं पलटना बेहद हैरान करने वाला

सायनी घोष का बागी खेमे की तरफ रुख करना राजनीतिक गलियारों को इसलिए हैरान कर रहा है क्योंकि वह ममता बनर्जी की सबसे कट्टर समर्थकों में से एक रही हैं। हाल ही में उन्हें पार्टी की युवा शाखा (Youth Wing Chief) का प्रमुख भी नियुक्त किया गया था।

  • ममता को बताया था भावी PM: विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सायनी ने ही ममता बनर्जी को देश का भावी प्रधानमंत्री प्रोजेक्ट किया था। उन्होंने मीडिया (NDTV) से बातचीत में कहा था कि "अगर दीदी जीतती हैं, तो बंगाल जीतता है" और दावा किया था कि वह कभी ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगी।

  • BJP पर किए थे तीखे हमले: सायनी हमेशा से बीजेपी की नीतियों (जैसे महिला आरक्षण बिल) की मुखर विरोधी रही हैं। चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने कहा था, "हम हारे नहीं हैं, बल्कि वोटों की चोरी और लूट के कारण ममता बनर्जी को हराया गया है। जनता 2029 और 2031 में इसका करारा जवाब देगी।"

सस्मिता देव भी छोड़ चुकी हैं पार्टी

टीएमसी के भीतर बगावत की आग सिर्फ सायनी घोष तक सीमित नहीं है। इससे पहले राज्यसभा सांसद सुस्मिता देव भी तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे चुकी हैं और उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात कर अपने भविष्य के लिए "मार्गदर्शन" मांगा था।

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विरोधियों पर अपने तीखे तंज और बयानों के लिए मशहूर सायनी घोष का यह कदम पश्चिम बंगाल और केंद्र की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।