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अरविंद केजरीवाल के खिलाफ 'कोर्ट वीडियो लीक' मामला: जस्टिस तेजस करिया ने खुद को सुनवाई से किया अलग

दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका पर टली सुनवाई; जज ने पूर्व में मेटा (फेसबुक) का वकील रहने के कारण लिया फैसला।

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दिल्ली हाई कोर्ट में अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ दायर अवमानना याचिका में एक नया मोड़ आया है। बुधवार को इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस तेजस करिया ने खुद को सुनवाई से अलग  कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह जनहित याचिका (PIL) अधिवक्ता वैभव सिंह द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के अन्य सदस्यों ने दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही का एक वीडियो सोशल मीडिया पर अनधिकृत रूप से साझा किया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह न केवल अदालती नियमों का उल्लंघन है, बल्कि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट (अदालत की अवमानना) के दायरे में भी आता है।

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जस्टिस तेजस करिया ने क्यों छोड़ा केस?

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि न्यायाधीश बनने से पहले, जस्टिस तेजस करिया एक वकील के रूप में सक्रिय थे। साल 2024 में इसी याचिकाकर्ता (वैभव सिंह) द्वारा दायर एक अन्य मामले में, जस्टिस करिया ने फेसबुक (मेटा) की पैरवी की थी।

हितों के टकराव (Conflict of Interest) से बचने के लिए उन्होंने नैतिकता के आधार पर इस पीठ से हटने का निर्णय लिया।

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अगला कदम और मांगें

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अब यह मामला इस बेंच द्वारा नहीं सुना जाएगा। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि:

  • मामले को कल (गुरुवार) किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।

  • याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश देने की मांग की गई है ताकि भविष्य में अदालती कार्यवाही की ऐसी अनधिकृत रिकॉर्डिंग और प्रसारण को रोका जा सके।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह के वीडियो लीक करने से न्यायिक प्रक्रिया की गोपनीयता और गरिमा प्रभावित होती है, इसलिए इसमें शामिल राजनीतिक दल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई अनिवार्य है।

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