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बंगाल में संवैधानिक संकट: हार के बाद भी ममता बनर्जी का इस्तीफे से इनकार, क्या राज्यपाल करेंगे बर्खास्त? जानें गवर्नर की पावर

इतिहास में पहली बार: ममता बनर्जी ने हार को बताया 'साजिश', मुख्यमंत्री पद छोड़ने से किया मना।

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में एक अभूतपूर्व संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। चुनाव में अपनी पार्टी की हार के बावजूद निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार (5 मई) को अपने पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को 'जनता का वास्तविक जनादेश' न मानकर इसे चुनाव आयोग और भाजपा की एक 'साजिश' करार दिया है।

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इस्तीफे के सवाल पर ममता का कड़ा रुख

कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने हुंकार भरते हुए कहा, "मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। हमारी हार जनता की वजह से नहीं, बल्कि एक साजिश के तहत हुई है। लगभग 100 सीटों पर जनादेश को लूटा गया है। मैं लोक भवन (राजभवन) नहीं जाऊंगी।" उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर भी लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया।

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गवर्नर के पास क्या हैं संवैधानिक विकल्प?

भारतीय संसदीय लोकतंत्र में यह अपनी तरह का पहला मामला है। संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई मुख्यमंत्री बहुमत खोने या चुनाव हारने के बाद इस्तीफा नहीं देता है, तो राज्यपाल के पास निम्नलिखित शक्तियां होती हैं:

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  1. अनुच्छेद 164 के तहत बर्खास्तगी: संविधान के इस अनुच्छेद के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। यदि मुख्यमंत्री स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं देते, तो राज्यपाल उन्हें बर्खास्त (Dismiss) करने का आदेश जारी कर सकते हैं।

  2. 7 मई की समयसीमा: मौजूदा पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। इसके बाद पुरानी विधानसभा स्वतः भंग हो जाएगी और ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री के रूप में बने रहना कानूनी रूप से अवैध हो जाएगा।

  3. नई सरकार की नियुक्ति: राज्यपाल मौजूदा मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बिना भी नई निर्वाचित पार्टी के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं। परंपरा के तौर पर इस्तीफा मांगा जाता है, लेकिन यह कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है कि इस्तीफे के बाद ही नई नियुक्ति हो।

  4. अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन): यदि ममता बनर्जी के इस रुख के कारण राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ती है या नई सरकार के गठन में अड़चन आती है, तो राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।

'इंडिया' गठबंधन और भविष्य की रणनीति

ममता बनर्जी ने दावा किया कि 'इंडिया' गठबंधन के नेता उनके संपर्क में हैं। सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी उनसे बात कर एकजुटता जताई है। साथ ही उन्होंने बंगाल में चुनावी हिंसा के आकलन के लिए एक 10 सदस्यीय समिति बनाने की घोषणा की है। फिलहाल, सबकी निगाहें राजभवन पर टिकी हैं कि 7 मई की समयसीमा के बाद राज्यपाल क्या कदम उठाते हैं।