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पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर: हरभजन सिंह की सुरक्षा छिनी, राघव चड्ढा के दावे के बाद क्या BJP में होंगे शामिल?

सुरक्षा वापस: जेड कैटेगरी की सुरक्षा हटाई गई, घर के बाहर से सुरक्षाकर्मी गायब।

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जालंधर/चंडीगढ़: पंजाब की सियासत में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। आम आदमी पार्टी (AAP) के दिग्गज नेता राघव चड्ढा के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद अब राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। इसी बीच, पंजाब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस ले ली है।

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सुरक्षा घेरा हटा, घर के बाहर सुरक्षाकर्मी नदारद

हरभजन सिंह के पीए मनदीप सिंह ने पुष्टि की है कि राज्य सरकार ने सांसद की सुरक्षा वापस ले ली है। जालंधर स्थित उनके निवास से सुरक्षाकर्मियों को हटा लिया गया है। गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने उन्हें 'जेड कैटेगरी' की सुरक्षा प्रदान की थी। इससे पहले राघव चड्ढा की सुरक्षा भी इसी तरह वापस ली गई थी, जिन्हें बाद में केंद्र सरकार द्वारा 'वाई' कैटेगरी की सुरक्षा दी गई।

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राघव चड्ढा का दावा: 7 सांसद छोड़ रहे हैं AAP

भाजपा में शामिल होने के बाद राघव चड्ढा ने दिल्ली और पंजाब की राजनीति में खलबली मचा दी है। उन्होंने दावा किया कि हरभजन सिंह सहित कुल 7 सांसद आम आदमी पार्टी छोड़ चुके हैं। चड्ढा ने कहा, "जिस पार्टी को हमने खून-पसीने से सींचा, वह अब अपने मूल्यों से भटक गई है।" उन्होंने राज्यसभा सभापति को दस्तखत किए हुए दस्तावेज सौंपने की बात भी कही है, ताकि दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता सुरक्षित रहे।

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कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा: घरों पर लिखा 'गद्दार'

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखा जा रहा है। लुधियाना और जालंधर में प्रदर्शनकारियों ने हरभजन सिंह, अशोक मित्तल और राजिंदर गुप्ता के आवासों के बाहर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने स्प्रे पेंट से उनके घरों की दीवारों पर 'गद्दार' और 'पंजाब दे गद्दार' लिख दिया।

भाजपा और आप के बीच जुबानी जंग

राघव चड्ढा और संदीप पाठक के साथ अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी जैसे बड़े नामों के भी भाजपा में शामिल होने की चर्चा है। इस टूट ने आम आदमी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को हिलाकर रख दिया है। वहीं, भाजपा इसे 'ईमानदारी की जीत' बता रही है, तो 'आप' इसे लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करार दे रही है।

अभी तक हरभजन सिंह ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साधी हुई है। अब देखना यह होगा कि क्या वे भी राघव चड्ढा की राह पर चलते हुए औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थामते हैं या नहीं।