जौनपुर एनकाउंटर पर भड़के अखिलेश यादव: बोले- यूपी में PDA वालों के हो रहे फर्जी एनकाउंटर, पुलिसवाले बन रहे मानसिक रोगी
सपा प्रमुख का बड़ा हमला: 'जिस एनकाउंटर के पीछे चले मर्जी, वो है फर्जी'
लखनऊ (भदैनी मिरर): समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जौनपुर में दूल्हे आजाद बिंद के हत्यारोपी रवि यादव के पुलिस एनकाउंटर पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सपा प्रमुख ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में अपनी धाक जमाने के लिए 'फर्जी एनकाउंटर' की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सूबे में सबसे ज्यादा निशाना 'पीडीए' (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के लोगों को बनाया जा रहा है।


'जिस एनकाउंटर के पीछे चले मर्जी, वो है फर्जी'
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को घेरते हुए एक नया नारा दिया। उन्होंने कहा:
"उत्तर प्रदेश में आज फर्जी एनकाउंटर सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। सीधी सी बात है- जिस एनकाउंटर के पीछे सरकार की मर्जी चले, वो एनकाउंटर पूरी तरह फर्जी है। सोमवार को जौनपुर में जो हुआ, वह भी इसी फेक एनकाउंटर का हिस्सा है। सरकार इन मुद्दों पर चर्चा ही नहीं होने देना चाहती।"
सपा प्रमुख ने कहा कि जिस समाज में कभी आपसी मेलजोल की संस्कृति थी, वहां अब नफरत फैलाई जा रही है। एनकाउंटर के जरिए लोगों के 'मेंटल सॉफ्टवेयर' को हिंसक बनाया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है और 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' (शक्ति ही अधिकार है) की विचारधारा को थोपा जा रहा है।

रिसर्च टीम का दावा: एनकाउंटर के आंकड़ों पर बड़ा खुलासा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव की रिसर्च टीम द्वारा पिछले 10 वर्षों में उत्तर प्रदेश में हुए एनकाउंटरों के विश्लेषण का एक डेटा भी पेश किया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर सपा ने दावा किया कि राज्य में अब तक एनकाउंटर में मारे गए अपराधियों में सबसे बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय की है।

इस सूची में दूसरे स्थान पर ब्राह्मण समुदाय के लोग हैं, जिनकी संख्या कुल एनकाउंटर में करीब 15 प्रतिशत बताई गई है। वहीं, तीसरे स्थान पर पासी और यादव बिरादरी के लोग शामिल हैं। अखिलेश ने कहा कि इन आंकड़ों से साफ है कि सरकार चुनिंदा समुदायों और पीडीए के लोगों को निशाना बना रही है।
"फर्जी एनकाउंटर करने वाले पुलिसवाले हो रहे मानसिक बीमार"
अखिलेश यादव ने इस दौरान पुलिसकर्मियों की मानसिक स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के हाथों फर्जी एनकाउंटर करवाकर उन्हें अपराधी बना रही है। सपा प्रमुख ने कहा:
"जो पुलिसकर्मी फर्जी एनकाउंटर में शामिल होते हैं, वे आत्मग्लानि (डिप्रेशन) का शिकार हो जाते हैं। वे इस मानसिक बोझ को नहीं संभाल पाते और शराब की लत में डूब जाते हैं। उनके परिवार भी इस खौफनाक सच के साथ जीने को मजबूर हैं कि उनके पिता या पति एक हत्यारे हैं। फर्जी एनकाउंटर करने वाले लोग धीरे-धीरे मानसिक रोगी बन रहे हैं।"
कस्टोडियल डेथ और निवेश पर उठाए सवाल
सपा मुखिया ने कासगंज की एक घटना का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां एक महिला को उसके पति के एनकाउंटर का डर दिखाकर उसका शोषण किया गया। उन्होंने आगे कहा कि यूपी में कानून व्यवस्था का जो डर दिखाया जा रहा है, उसके कारण प्रदेश में कोई नया निवेश नहीं आ रहा है। अखिलेश ने कस्टोडियल डेथ (पुलिस हिरासत में मौत) को भी फर्जी एनकाउंटर का ही एक रूप बताया और दावा किया कि इस मामले में उत्तर प्रदेश देश में नंबर एक पायदान पर है।
