क्या सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल? क्रूड की घटती कीमतों के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने दिया बड़ा बयान
तेल कंपनियों को झेलना पड़ा ₹74,781 करोड़ का नुकसान, अभी भी हो रही ₹2.18 लाख करोड़ की अंडर-रिकवरी
नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रही गिरावट के बीच क्या देश में पेट्रोल और डीजल सस्ता होने वाला है? इस सवाल पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में खुदरा ईंधन की कीमतों में तत्काल कमी संभव नहीं है और उपभोक्ताओं को इसके लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।


क्यों कम नहीं हो रहे पेट्रोल-डीजल के दाम?
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) इस समय करीब 2.18 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय घाटे (अंडर-रिकवरी) की भरपाई कर रही हैं। उन्होंने कहा, "इस समय ईंधन की कीमतों को कम करने का सवाल उचित नहीं है। अगर अगले दो-तीन महीनों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नरम और स्थिर रहती हैं, तब सरकार इस पर विचार करेगी।"

आमतौर पर तेल कंपनियां कच्चे तेल को कम से कम दो महीने पहले ही खरीद लेती हैं। वर्तमान में रिफाइनरियों में जिस क्रूड का प्रसंस्करण (Processing) हो रहा है, वह अप्रैल या मई के महीने में महंगे दामों पर खरीदा गया था। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड सस्ता होने के बावजूद घरेलू बाजार में इसका सीधा फायदा तुरंत नहीं मिल पा रहा है।

पश्चिम एशिया संकट से लगा बड़ा झटका
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में उपजे तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई थीं। हरदीप पुरी ने जानकारी दी कि 30 जून तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लागत से कम दाम पर बेचने के कारण तेल कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
हालांकि, भारत सरकार ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद देश के उपभोक्ताओं को कीमतों के भारी उतार-चढ़ाव से बचाए रखा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बढ़े तनाव के दौरान भी देश के 1.07 लाख से अधिक फ्यूल रिटेल आउटलेट्स पर ईंधन की सप्लाई सामान्य रूप से जारी रही। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में भारत में पेट्रोल की कीमतों में महज 5.58% और डीजल में 6.23% की ही बढ़ोतरी हुई है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है।
2030 तक बढ़ेगी भारत की शोधन (Refining) क्षमता
देश की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार बड़े स्तर पर काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत की तेल शोधन क्षमता साल 2030 तक बढ़कर 309.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) होने का अनुमान है। इसके लिए कई रिफाइनरी विस्तार और ग्रीनफील्ड परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनमें से कुछ परियोजनाएं आगामी दो वर्षों में पूरी हो जाएंगी। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलेगी।
