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पश्चिम बंगाल SIR विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश-मतदाताओं की ‘तार्किक विसंगति’ सूची को सार्वजनिक करे चुनाव आयोग

पश्चिम बंगाल में करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम इस तार्किक विसंगति सूची में दर्ज हैं

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पुलिस महानिदेशक को दिया आदेश, पूरी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था की कोई समस्या न हो और काम शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराएं

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने चुनाव आयोग को 1.25 करोड़ मतदाताओं की ‘तार्किक विसंगति’ सूची को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि पहले बिहार और अब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में चल रहे मतदाता सूची के (एसआईआर) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग (ईसी) को अहम निर्देश दे दिया। 

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जिन मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगति (लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी) की सूची में हैं, उनकी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाय। कोर्ट ने कहा कि यह सूची ग्राम पंचायत भवनों, तालुका स्तर के ब्लॉक कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में लगाई जाय, ताकि आम लोग इसे आसानी से देख सकें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहाकि पश्चिम बंगाल में करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम इस तार्किक विसंगति सूची में दर्ज हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह विसंगतियां मुख्य रूप से 2002 की मतदाता सूची से वंश (प्रोजेनी) मिलान के दौरान सामने आई हैं। इसमें मतदाता और उसके माता-पिता के नाम में मेल न होना, मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र का अंतर 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा होना जैसे प्रावधान शामिल है।

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मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि जिन लोगों के नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया से प्रभावित हो सकते हैं, उन्हें अपने दस्तावेज और आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाए। अदालत ने निर्देश दिया कि दस्तावेज और आपत्तियां जमा करने के लिए पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में विशेष काउंटर बनाए जांय। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार चुनाव आयोग को पर्याप्त मानव संसाधन (स्टाफ) उपलब्ध कराए। हर जिले में चुनाव आयोग या राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाय। राज्य के पुलिस महानिदेशक यह सुनिश्चित करें कि पूरी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था की कोई समस्या न हो और काम शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो। सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर यह सुनवाई कर रहा था जिनमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में मनमानी और प्रक्रियागत खामियां हैं। अदालत ने कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाली होनी चाहिए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से न हटे।

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