पैकेज्ड फूड पर वॉर्निंग लेबल विवाद: 'आप नहीं करेंगे तो हम करेंगे', FSSAI और केंद्र पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
कॉर्पोरेट दबाव में काम करने का आरोप: शीर्ष अदालत ने FSSAI से पूछा— क्या आप कोर्ट को बेवकूफ बना रहे हैं?
भदैनी मिरर न्यूज़ डेस्क: देश में बिकने वाले पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स में एक्स्ट्रा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। पैकेज्ड फूड के फ्रंट (सामने) पर स्पष्ट चेतावनी (Warning Label) लगाने में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की टालमटोल पर शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और FSSAI दोनों को फटकार लगाई है।


मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन (तथा पीठ में शामिल अन्य जजों) की बेंच ने खाद्य नियामक (Food Watchdog) के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, "अगर आप यह नहीं कर सकते, तो हम आदेश जारी करेंगे।"

"क्या कॉर्पोरेट घरानों के दबाव में हैं अधिकारी?"
जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने FSSAI से सीधा सवाल किया कि क्या वह फूड इंडस्ट्री और बड़े कॉर्पोरेट हाउस के दबाव में काम कर रही है? पीठ ने टिप्पणी की:
"यह मामला सीधे तौर पर आम नागरिकों और खासकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर फैसले कॉर्पोरेट घरानों के हित या दबाव से प्रभावित नहीं होने चाहिए।"
याचिकाकर्ता के वकील ने 7 मार्च को हुई FSSAI की बैठक के मिनट्स का हवाला देते हुए बताया कि FSSAI पैकेट के आगे वॉर्निंग लेबल लगाने के बजाय सिर्फ न्यूट्रिशन टेबल देने का सुझाव दे रहा है, जो कोर्ट के पिछले निर्देशों के विपरीत है।

सिविल सोसाइटी के तर्कों को नजरअंदाज करने का आरोप
अदालत के समक्ष यह बात भी सामने आई कि FSSAI के हलफनामे में सिर्फ खाद्य उद्योग के विरोध को जगह दी गई, जबकि सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों द्वारा जमा किए गए उन साक्ष्यों को खारिज कर दिया गया जो पैकेज्ड फूड से होने वाली बीमारियों के प्रति आगाह करते हैं।
इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "क्या आप कोर्ट को बेवकूफ बना रहे हैं? हम जानते हैं कि आप पर कॉर्पोरेट घरानों का भारी दबाव है और आप उसके आगे झुक रहे हैं। हम यह सब जनहित (Public Interest) में कर रहे हैं, अपने लिए नहीं।"
'नमकीन' और भारतीय स्नैक्स पर भी उठा सवाल
सुनवाई के दौरान जब यह दलील दी गई कि वॉर्निंग लेबल लागू होने से कई पारंपरिक भारतीय स्नैक्स और नमकीन भी इस दायरे में आ जाएंगे, तो कोर्ट ने बेहद कड़ा सवाल पूछा— "क्या आप नहीं चाहते कि इस देश के लोग और हमारे बच्चे सेहतमंद रहें?"
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) बृजेंद्र चाहर ने जब सरकार का पक्ष रखने और एक्शन प्लान बताने का अनुरोध किया, तो बेंच ने स्पष्ट किया कि सरकार को अदालत के निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा, अन्यथा कोर्ट खुद इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करेगा।
