शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन, यह गलत है-उमा भारती
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से प्रयागराज प्रशासन के सबूत मांगने के सवाल पर भड़की पूर्व सीएम
एक्स पर पोस्टम में कहा-यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों का एवं विद्वत परिषद का है
नई दिल्ली। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने के सबूत मांगने पर उमा भारती ने बड़ा बयान दिया है। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने प्रशासन द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने के सबूत मांगे जाने की आलोचना की है।


वरिष्ठ भाजपा नेत्री उमा भारती ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए अपने एक्स पोस्ट पर लिखा कि मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है। यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों का एवं विद्वत परिषद का है। उमा भारती ने अपने इस पोस्ट कों बीजेपी एमपी, बीजेपी यूपी, यूपी सीएम ऑफिस और ज्योतिर्मठ को भी टैग किया है। उन्होंने शंकराचार्य का सबूत मांगने को गलत बताया है। इस पोस्ट में उमा भारती ने बीजेपी एमपी, बीजेपी यूपी, यूपी सीएम ऑफिस और ज्योतिर्मठ को टैग किया है।

बाद में उमा भारती ने एक और पोस्ट के जरिए साफ किया कि उनका बयान यूपी के सीएम योगी के खिलाफ नहीं है। योगी विरोधी खुश फहमी ना पालें। मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं। किंतु मैं इस बात पर कायम हूं कि प्रशासन कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करे, लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है।

