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संसद में हमारे सांसद बुलंद आवाज के साथ लगाएंगे वंदे मातरम नारा-उद्धव ठाकरे 

राज्यसभा सचिवालय ने 24 नवंबर को सदस्यों को जारी निर्देश से उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी ने जताई नाराजगी

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हमारी आजादी का नारा और राष्ट्रगीत है वंदे मातरम, हम क्यों न लागाएं नारा-ममता बनर्जी 

मुम्बई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी के सांसद संसद में बुलंद आजाव से जोर-जोर वंदे मातरम का नारा लगाएंगे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उसमें हिम्मत है तो उन्हें संसद से बाहर निकालकर दिखाए। गौरतलब है कि राज्यसभा सचिवालय ने 24 नवंबर को सदस्यों को जारी एक निर्देश में कहा है कि वंदे मातरम और जय हिंद जैसे नारे सदन के भीतर या बाहर लगाना संसदीय शिष्टाचार का उल्लंघन माना जाएगा। इस पर उद्धव ठाकरे ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। 

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मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब अविभाजित शिवसेना भाजपा के साथ थी, तब भाजपा कहती थी कि जो इस देश में रहना चाहते हैं, उन्हें वंदे मातरम कहना चाहिए और अब उसी वंदे मातरम को संसदीय शिष्टाचार का उल्लंघन माना जा रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या इस निर्देश को जारी करने वाले अधिकारी को पाकिस्तान भेजा जाएगा? यह भी पूछा कि क्या ’मैकाले की संतानें’ भाजपा में घुस आई हैं? आगे कहा कि उनके सांसद जोर-जोर से वंदे मातरम कहेंगे और देखेंगे कि कौन उन्हें संसद से निकालता है। कहा कि अगर भाजपा में हिम्मत है, तो वह उनकी पार्टी के सांसदों को बाहर निकालकर दिखाए। 

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आपको बता दें कि ’राज्यसभा सदस्यों के लिए हैंडबुक’ में नारे न लगाने का निर्देश है। इसे एक दिसंबर से होने वाले संसद सत्र से पहले जारी किया गया है। राज्यसभा सचिवालय सूत्रों के मुताबिक, यह पहला मौका नहीं, जब ऐसा निर्देश जारी किया गया है। नवंबर 2005 में यूपीए सरकार के दौरान भी इसी तरह का परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया गया था। इसके अलावा महाराष्ट्र कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य में ’वंदे मातरम’ को लेकर ’अनावश्यक और दुर्भाग्यपूर्ण’ विवाद खड़ा कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि भाजपा राष्ट्रीय गीत का इस्तेमाल अल्पसंख्यक विधायकों को निशाना बनाने और ’ध्रुवीकरण का एजेंडा’ आगे बढ़ाने के लिए कर रही है। बताया कि इसी हफ्ते भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस विधायकों असलम शेख और अमीन पटेल के दफ्तरों के बाहर ’वंदे मातरम’ गाने का कार्यक्रम किया।

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उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के निर्वाचित प्रतिनिधियों को डराने और बदनाम करने की कोशिश थी। भाजपा वंदे मातरम को हथियार बनाकर सांप्रदायिक तनाव पैदा कर रही है। संसद में जय हिंद और वंदे मातरम जैसे नारों पर रोक लगाने को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है । इस फैसले पर ममता बनर्जी ने नाराजगी जाहिर की है । उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि क्यों नहीं बोलेंगे? हम जय बांग्ला, बांग्ला में बोलते हैं. वंदे मातरम कहते हैं।  यह हमारी आजादी का नारा है. राष्ट्रगीत है. जय हिंद नेताजी (सुभाष चंद्र बोस) का नारा है. जिस नारे को लेकर हम लोगों ने लड़ा है. यह हमारे देश का नारा है. इससे जो टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा। 

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