संचार साथी ऐप पर बढ़ा सियासी संग्राम, Apple भी उतरा मैदान में! सरकार के आदेश पर जताई आपत्ति
कांग्रेस ने ऐप को “पेगासस 2.0” बताया; सरकार बोली-यूज़र चाहें तो हटा सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple सरकारी आदेश मानने को तैयार नहीं।
नई दिल्ली। देश में मोबाइल फोन में ‘संचार साथी’ ऐप को अनिवार्य रूप से प्रीलोड करने के दूरसंचार मंत्रालय के निर्देश को लेकर राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। जहां कांग्रेस ने इसे पेगासस जैसी जासूसी व्यवस्था करार देते हुए तीखा विरोध दर्ज किया है, वहीं केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि यह ऐप सिर्फ सुरक्षा के लिए है और यूज़र चाहें तो इसे हटाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।


इसी बीच, अमेरिकी दिग्गज टेक कंपनी Apple ने भी संकेत दिए हैं कि वह इस आदेश का पालन नहीं करेगी। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी जल्द ही अपनी चिंताएँ सरकार के सामने रखेगी।
सरकार के आदेश पर Apple की आपत्ति: “दुनिया में कहीं ऐसा नहीं करते”
NDTV ने तीन अधिकारियों के हवाले से बताया कि Apple ऐप को अनिवार्य रूप से प्रीलोड करने के आदेश का पालन करने के मूड में नहीं है।
सूत्रों के अनुसार -

- Apple का कहना है कि वह दुनिया में कहीं भी किसी भी सरकार का ऐसा आदेश नहीं मानता,
- और iOS इकोसिस्टम की प्राइवेसी और सिक्योरिटी गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
एक उद्योग सूत्र ने आदेश को “हथौड़े नहीं, डबल-बैरल गन” की तरह बताया, यानी यह कंपनियों पर बहुत ज़्यादा दबाव डालने जैसा है।
हालाँकि Apple और टेलीकॉम मंत्रालय ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
कांग्रेस ने उठाया निगरानी का मुद्दा-सरकार ने दिया जवाब

सरकार के निर्देश पर सबसे पहले राजनीति गरमाई।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि—
“संचार साथी ऐप पेगासस की तरह निगरानी का नया हथियार है।”
विवाद बढ़ने पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा - “यूज़र इसे जब चाहे डिलीट कर सकता है। रखना जरूरी नहीं है। यह ऐप लोगों को धोखाधड़ी और चोरी से बचाने के लिए है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐप को रजिस्टर किया जाए तभी वह सक्रिय होता है, अन्यथा नहीं।
सरकार का आदेश: 90 दिन में सभी नए फोन में ऐप अनिवार्य
दूरसंचार विभाग के 28 नवंबर के गोपनीय निर्देश के मुताबिक-
- 90 दिनों के बाद भारत में निर्मित या आयातित हर नए फोन में संचार साथी ऐप प्रीलोड होना जरूरी,
- 120 दिनों के भीतर कंपनियों को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी,
- सप्लाई चेन में मौजूद पुराने डिवाइस में भी ऐप सॉफ्टवेयर अपडेट के ज़रिए डालना होगा,
- और फोन मैन्युफैक्चरर को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐप डिसेबल ना हो।
सरकार का कहना है कि ऐप चोरी हुए फोन को ट्रैक करने, ब्लॉक करने और मिसयूज़ रोकने के लिए ज़रूरी है।
“तो हटा दीजिए”—मंत्री सिंधिया की बड़ी सफाई
विवाद बढ़ने पर सिंधिया ने स्पष्ट किया - “अगर किसी को ऐप नहीं चाहिए, तो वह इसे हटा सकता है। रजिस्टर नहीं करेंगे तो ऐप निष्क्रिय रहेगा।”
सिंधिया ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि यह ऐप हर ज़रूरतमंद तक पहुँचे ताकि फ्रॉड और फोन चोरी से लोगों को बचाया जा सके।
तकनीकी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर जारी खींचतान
अब यह मामला सिर्फ राजनीतिक विवाद नहीं रहा, बल्कि Apple जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनी के शामिल होने से तकनीकी मोर्चे पर भी बहस तेज हो गई है।
देखना होगा कि सरकार ऐप अनिवार्यता पर अपने निर्देशों में बदलाव करती है या फिर टेलीकॉम कंपनियों और मोबाइल ब्रांड्स को सख्ती से पालन करना पड़ेगा।
