नीरव मोदी, विजय माल्या और महादेव बेटिंग ऐप जैसे बड़े घोटालों की जांच करने वाले IRS अफसर ने लिया VRS, जानें वजह
Who is Satyabrata Kumar: कौन हैं पूर्व ED अधिकारी सत्यब्रत कुमार? रिटायरमेंट से 11 साल पहले ही छोड़ी नौकरी
नई दिल्ली (भदैनी मिरर डेस्क): देश के कई हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग और बड़े आर्थिक घोटालों का पर्दाफाश करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व विशेष निदेशक सत्यव्रत कुमार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वरिष्ठ आईआरएस (IRS) अधिकारी सत्यव्रत कुमार ने अपनी सरकारी नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इसी महीने उनके वीआरएस के औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।


खास बात यह है कि सत्यव्रत कुमार की सेवानिवृत्ति साल 2037 में होनी थी, लेकिन उन्होंने अपनी तय उम्र (60 वर्ष) से करीब 11 साल पहले ही (48 वर्ष की आयु में) सरकारी सेवा को अलविदा कह दिया।
क्यों लिया तय समय से पहले वीआरएस?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने अप्रैल महीने में ही सत्यव्रत कुमार के वीआरएस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी थी। प्रशासनिक गलियारों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुमार ने अपने जीवन के कुछ व्यक्तिगत कार्यों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और निजी रुचियों (Personal Interests) को समय देने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है।

कौन हैं सत्यव्रत कुमार और कैसा रहा करियर?
सत्यव्रत कुमार 2004 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी हैं, जो सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर (Customs and Indirect Taxes) कैडर से आते हैं। वह ईडी (ED) के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रतिनियुक्ति (Deputed) पर रहने वाले जांबाज अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने करीब 12 वर्षों तक प्रवर्तन निदेशालय में अपनी सेवाएं दीं।

एक साल पहले ही उन्हें ईडी से उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया था, जिसके बाद वे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कमिश्नर (अपील) के पद पर तैनात थे।
इन बड़े घोटालों की जांच का किया नेतृत्व
ईडी के मुंबई स्थित पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख के तौर पर सत्यव्रत कुमार ने देश के सबसे चर्चित और संवेदनशील आर्थिक अपराधों की जांच का जिम्मा संभाला:
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नीरव मोदी-मेहुल चोकसी केस: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के इस महाघोटाले की जांच कुमार की देखरेख में हुई। उन्होंने भगोड़े हीरा कारोबारियों की करोड़ों रुपये की विदेशी संपत्तियों को कुर्क करने में अहम भूमिका निभाई थी।
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विजय माल्या लोन फ्रॉड: बैंकों का हजारों करोड़ रुपये लेकर लंदन भागे शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस का नेतृत्व भी सत्यव्रत ने किया था।
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महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप: छत्तीसगढ़ के कई बड़े राजनेताओं, नौकरशाहों और नामचीन व्यवसायियों के सिंडिकेट से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल सट्टेबाजी घोटाले की कड़ियां भी उन्होंने ही खंगाली थीं।
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महाराष्ट्र के सियासी मामले: महाराष्ट्र के कई रसूखदार राजनेताओं से जुड़े संवेदनशील मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच भी उनके ही दिशा-निर्देशन में आगे बढ़ी थी।
एक साल के भीतर दूसरे बड़े अधिकारी का इस्तीफा
प्रशासनिक हलकों में इस बात की भी चर्चा तेज है कि पिछले एक साल के भीतर केंद्रीय जांच एजेंसियों से हटने के बाद इस्तीफा देने वाले सत्यव्रत कुमार दूसरे बड़े अधिकारी बन गए हैं।
कपिल राज ने भी दिया था इस्तीफा: इससे पहले जुलाई 2025 में, ईडी के पूर्व संयुक्त निदेशक और 2009 बैच के आईआरएस अधिकारी कपिल राज ने भी अपनी रिटायरमेंट से 15 साल पहले पद से इस्तीफा दे दिया था। कपिल राज ने झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी से जुड़े मामलों का पर्यवेक्षण किया था। इस्तीफा देते समय वह दिल्ली में जीएसटी इंटेलिजेंस विंग में अतिरिक्त आयुक्त थे।
