माफिया सरगनाओं और सत्ताधारियों के संरक्षण में फल-फूल रहा था जानलेवा कफ सिरप का कारोबार
पूर्वांचल के दो माफिया सरगानाओं से थे अमित सिंह टाटा और शुभम जायसवाल के सम्बंध
माफियाओं को है भरोसा, नही आएंगी उन तक आंच, सारा खेल जान रहे विपक्षी दलों के नेता
वाराणसी, भदैनी मिरर। जानलेवा और प्रतिबंधित कफ सिरप की तस्करी के तार यूपी, बिहार, झारखंड से लगायत कोलकाता और बांग्लादेश तक जुड़े है। साथ ही इस मामले में गिरफ्तार अमित सिंह टाटा और शुभम जायसवाल गैंग के सक्रिय सदस्य शुभम जायसवाल के कनेक्शन पूर्वांचल के माफिया डॉन और बाहुबलियों से रहे हैं। सूत्रों के अनुसार करोड़ों के इस कारोबार में इन माफिया सरगनाओं का हिस्सा था। इनमें से अधिकतर माफिया सरगना सत्ताधारी पार्टी से जुड़े हैं। यानी मासूम बच्चों की जिंदगी लेनेवाले जहरीले कफ सिरप के तस्करी के खेल में सत्तापक्ष के कई लोग भी शामिल रहे हैं।



बता दें कि कफ सिरप पीने के बाद बच्चों की मौत का मामला मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में सामने आया था। जानकारी के मुताबिक सर्दी-खांसी होने के बाद जब बच्चों के माता-पिता उन्हें डॉक्टर के पास ले गए तो डॉक्टर ने कोल्ड्रिफ सिरप लेने का सुझाव दिया था। कफ सिरप पीने के बाद बच्चों की हालत बिगड़ती चली गई और एक-एक करके 20 से ज्यादा बच्चों की मौत का मामला सामने आया था।

काली कोट की आड़ में जरायम और जहरीली कफ सिरप का धंधा
कफ सिरप प्रकरण की जांच आगे बढ़ी तो सत्ता के संरक्षण में फल-फूल रहे माफिया सरगनाओं तक पहुंच गया। इस मामले में गिरफ्तार अमित सिंह टाटा कभी महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ छात्र संघ चुनाव से सक्रिय रहता था। इसका नाम पूर्व में मुन्ना बजरंगी गिरोह से भी जुड़ा था। सात आपराधिक मुकदमों में आरोपित अमित सिंह टाटा कचहरी में अधिवक्ता भी है। काली कोट की आड़ में यह अवैध करोबार करता रहा। पूर्व में वाराणसी सेंट्रल बार की प्रबंध समिति का सदस्य भी रह चुका है। सेंट्रल बार के पूर्व उपाध्यक्ष अधिवक्ता राजा आनंद ज्योति सिंह की मौत में अमित सिंह टाटा पर जहर देकर मारने का आरोप था। ज्योति के पिता ने चौबेपुर थाने में अमित सिह टाटा के खिलाफ तहरीर दी थी। बताते हैं कि अमित सिंह पिछले दो साल से शुभम जायसवाल के संपर्क में आकर कफ सिरप तस्करी के नेटवर्क को संभाल रहा था। जौनपुर के पूर्व सांसद के भरोसेमंद बन चुके अमित सिंह टाटा को जौनपुर के रामपुर ब्लॉक से ब्लॉक प्रमुख बनाने के लिए पूर्व सांसद की टीम काम कर रही थी। फायनेंस की जिम्मेदारी वाराणसी के प्रहलाद घाट के रहनेवाले और कफ सिरप तस्करी गिरोह के सक्रिय सदस्य शुभम ने अपने कंधे पर ले रखी थी। खास बात यह कि गिरफ्तारी से पहले अमित सिंह टाटा उज्जैन महाकाल के दर्शन के लिए गया था। उसके साथ पूर्व सांसद के साथ रहने वाले बर्खास्त सिपाही सहित चार लोग थे। दर्शन के बाद एसटीएफ ने बर्खास्त सिपाही और अमित सिंह टाटा को हिरासत में लिया। पूर्व सांसद के प्रभाव में बर्खास्त सिपाही को छोड़ दिया गया, लेकिन अमित सिंह टाटा के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य होने के कारण पूर्व सांसद ने अपने कदम पीछे खींच लिए।
चर्चा है कि अमित सिंह टाटा वाराणसी के रहनेवाले और पूर्वांचल के माफिया डॉन कहे जानेवाले प्रभावशाली व्यक्ति से भी जुड़ा रहा। आपको यह भी बता देंं कि इन माफिया सरगनाओं को वर्तमान में सत्ताधारियों का संरक्षण मिला हुआ है। अधिकतर माफिया ट्रस्टों की जमीन कब्जा करने, अवैध कारोबार, खनन, शराब और नशीले पदार्थों की तस्करी में लिप्त पाये जा रहे हैं। अमित की गिरफ्तारी के बाद जरायम जगत से जुड़े इनके विरोधी अब इनकी परतें खोल रहे हैं। अमित सिंह टाटा पिछले दो साल के अंदर फार्च्यूनर, स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियों के काफिले से चल रहा था। बताते हैं कि यह गाड़ियां शुभम जायसवाल ने ही टाटा को गिफ्ट की थी। माफियाओं से सम्बंधों के कारण शुभम अपने साथ अमित सिंह टाटा को रखने लगा। ताकि दूसरा कोई माफिया उनसे रंगदारी न वसूल सके।


तीन नेताओं को शुभम ने दी हैं लक्जरी गाड़ियां
एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया कि पूर्वांचल के तीन नेताओं को शुभम जायसवाल ने लैंड क्रूजर और फार्च्यूनर जैसी गाड़ियां गिफ्ट में दी हैं। दुबई में बैठे शुभम जायसवाल के करीबी वरुण सिंह, गौरव जायसवाल, सिगरा के होटल और रियल एस्टेट कारोबारी समेत अन्य कई नामों का खुलासा होना बाकी है। पूर्वांचल के जौनपुर, चंदौली, वाराणसी के कई नेताओं और रसूखदारों को शुभम लाभान्वित कर चुका है। एप्पल के मैकबुक में शुभम ने सभी का काला चिट्ठा का हिसाब रखा हुआ है। साड़ी, होटल, बालू, कोयला, सरिया समेत अन्य कारोबार में भी शुभम ने कदम बढ़ा दिए थे। कफ सिरप समेत कई अवैध कारोबार में शुभम, अमित सिंह टाटा के साथ माफिया सरगनाओं के नाम सामने आने के बाद सत्ताधारी दल से जुड़े कई नेता इन्हे बचाने की जुगत में लग गये हैं। इस काले कारोबार की चर्चा तो सत्ता के गलियारों तक है। विपक्षी दलों को भी पता है। शायद यही वजह थी कि कफ सिरप मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अजय राय ने अविश्वास व्यक्त किया और मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। उधर, सत्ता के सरंक्षण में रहकर अरबों का कारोबार कर रहे माफिया सरगनाओं को भरोसा है कि उन तक आंच नही आयेगी और मामले को समय के साथ दबा दिया जाएगा।
