CM Vijay Action: तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय का भ्रष्टाचार पर 'सर्जिकल स्ट्राइक', पार्टी फंड के नाम पर हो रही ₹1600 करोड़ की लूट पर रोक!
चाय बेचने वाले के बेटे (एक्साइज मिनिस्टर) को मिली कमान
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में एंट्री के साथ ही अपनी धमक दिखाने वाले अभिनेता से राजनेता बने मुख्यमंत्री विजय ने अब भ्रष्टाचार के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है। पदभार संभालने के बाद अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही सीएम विजय ने कड़े तेवर दिखाते हुए 'तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन' (TASMAC) में चल रहे व्यापक भ्रष्टाचार और अनधिकृत वसूली के सिस्टम को ध्वस्त करने का आदेश जारी कर दिया है।


₹1600 करोड़ की लूट: सरकारी खजाने में सेंध का खुलासा
सरकारी सूत्रों ने मुख्यमंत्री विजय को चौंकाने वाली जानकारी दी कि कैसे पिछले 5 वर्षों में सरकारी खजाने से लगभग 1,600 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, हर महीने करीब 102 करोड़ रुपये अनौपचारिक रूप से 'पार्टी फंड' के नाम पर कॉरपोरेशन के संचालन से बाहर निकाले जा रहे थे।

सीएम विजय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शराब की बिक्री से मिलने वाला एक-एक पैसा सीधे राज्य के खजाने (State Treasury) में पहुंचना चाहिए। अब इस मामले की जांच के घेरे में डीएमके (DMK) के शासनकाल के दौरान कॉरपोरेशन के इस्तेमाल की भी बात सामने आ रही है।
चाय बेचने वाले के बेटे (एक्साइज मिनिस्टर) को मिली कमान
भ्रष्टाचार के इस मकड़जाल को साफ करने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने अपने भरोसेमंद आबकारी मंत्री (Excise Minister) के. विग्नेश को सौंपी है। महज 37 साल के विग्नेश अपनी सादगी और जमीनी पृष्ठभूमि के लिए जाने जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, विग्नेश के माता-पिता कभी चाय की दुकान चलाते थे।

कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री विग्नेश ने कहा, "मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि हमारी सरकार को जनता को दर्द पहुंचाकर या भ्रष्टाचार के जरिए होने वाली कमाई की रत्ती भर भी जरूरत नहीं है।"
क्या था 'पार्टी फंड' वसूली का रेट कार्ड?
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के सामने उस सिंडिकेट का पर्दाफाश किया, जो सिस्टम का हिस्सा बन चुका था। इस अवैध वसूली का एक बकायदा 'रेट कार्ड' चल रहा था:
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लिकर केस (180ml/375ml): प्रति केस करीब ₹90 की वसूली।
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बीयर केस: प्रति केस ₹40 का पॉलिटिकल कलेक्शन।
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वाइन: ₹20 प्रति केस मंत्री या पार्टी फंड के नाम पर।
यह वसूली वेयरहाउस, ट्रांसपोर्टेशन और रिटेल आउटलेट्स (करीब 4,048 रजिस्टर्ड दुकानें) के स्तर पर की जा रही थी। आंकड़ों के मुताबिक, हर महीने करीब 88 लाख उपभोक्ता इस नेटवर्क से जुड़ते हैं, जिसका फायदा उठाकर करोड़ों की रकम अनाधिकारिक तौर पर वसूली जा रही थी।
"अभी तो यह झांकी है...": अगला निशाना खनन विभाग
सीएम विजय के करीबी सूत्रों का कहना है कि कॉरपोरेशन के खिलाफ यह अभियान तो महज एक शुरुआत है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में हर उस विभाग में 'सफाई अभियान' चलेगा जहां से सरकारी राजस्व (Revenue) आता है।
अंदरूनी जानकारी के मुताबिक, कॉरपोरेशन के बाद अगला निशाना 'खनन विभाग' (Mining Department) हो सकता है, जहां बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें मिली हैं। सीएम ने सभी विभागों को भ्रष्टाचार चिन्हित कर तत्काल रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
