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राम मंदिर दान अनियमितता की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई

गाजियाबाद में दर्ज FIR और SC/ST एक्ट की धाराओं के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुंचे पत्रकार अभिषेक उपाध्याय; निष्पक्ष जांच की मांग

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Abhishek
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अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित दान घोटाले और अनियमितताओं पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की उम्मीद है। शीर्ष अदालत ने गाजियाबाद में दर्ज कथित रोड-रेज मामले की FIR को रद्द करने और गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग वाली उनकी याचिका पर कल (मंगलवार) सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की है।

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चीफ जस्टिस ने दी त्वरित सुनवाई की मंजूरी

पत्रकार के वकील द्वारा मामले की गंभीरता और आपात स्थिति का हवाला दिए जाने के बाद, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने याचिका को कल के लिए सूचीबद्ध (List) करने का निर्देश दिया।

याचिका में उठाए गए प्रमुख बिंदु और आरोप:

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  • कड़ी धाराओं में मामला दर्ज: वकील ने अदालत को बताया कि राम मंदिर दान से जुड़ी खोजी रिपोर्टिंग करने के बाद पत्रकार के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। हाल ही में गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में दर्ज FIR में उनके खिलाफ SC/ST Act जैसी कठोर धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

  • रोड-रेज की मनगढ़ंत कहानी: 18 अगस्त की इस FIR के अनुसार, शिप्रा मॉल के पास कार और बाइक की टक्कर के बाद गाली-गलौज का आरोप लगाया गया है। वहीं, पत्रकार का कहना है कि वे अपनी बेटी को स्कूल से ला रहे थे और कोई शारीरिक झड़प या टक्कर नहीं हुई थी।

  • सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका: याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने घटना स्थल के आसपास की दुकानों पर जाकर दुकानदारों से CCTV फुटेज हटाने या न देने का दबाव बनाया है। सुप्रीम कोर्ट से इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

  • पुलिस की कार्रवाई और घर पर दबिश: पत्रकार का आरोप है कि 20 अगस्त की रात करीब एक दर्जन पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे, जबकि वहां केवल उनकी पत्नी और बेटियां थीं।

स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने अदालत से उत्तर प्रदेश पुलिस की इस कार्रवाई को अपनी स्वतंत्र खोजी पत्रकारिता पर हमला बताया है। उन्होंने मांग की है कि यदि जांच जरूरी हो, तो इसे UP पुलिस के बजाय किसी निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी (जैसे CBI) को सौंपा जाए, और तब तक उन्हें गिरफ्तारी जैसे किसी भी कठोर कदम से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की जाए।

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