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हैरान करने वाला: पढ़े-लिखे लोग भी 'डिजिटल अरेस्ट' के जाल में, CJI सूर्यकांत ने कहा- 'यह सीधी डकैती है'

केंद्र और RBI को सख्त निर्देश: बनेगा 'किल-स्विच' सिस्टम

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नई दिल्ली (भदैनी मिरर डेस्क): देश में तेजी से पांव पसार रहे 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) घोटालों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि उच्च शिक्षित लोग भी साइबर ठगों के झांसे में आ रहे हैं। कोर्ट ने इसे 'सीधी लूट और डकैती' करार देते हुए बैंकों और RBI को सुरक्षा तंत्र मजबूत करने के आदेश दिए हैं।

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एक बुजुर्ग महिला ने गंवाई जीवनभर की कमाई

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने एक हृदयविदारक उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके संज्ञान में एक बुजुर्ग महिला आईं, जिन्हें वह आधिकारिक रूप से जानते हैं। ठगों ने उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर उनकी पूरी रिटायरमेंट सेविंग्स हड़प ली। सीजेआई ने दुख जताते हुए कहा, "वह रो रही थीं, उन्होंने अपनी सारी जमा पूंजी खो दी। यह हैरान करता है कि पढ़े-लिखे लोग भी इस तरह आसानी से ठगे जा रहे हैं।"

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केंद्र और RBI को सख्त निर्देश: बनेगा 'किल-स्विच' सिस्टम

अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कोर्ट को बताया कि गृह मंत्रालय और अन्य विभाग इस पर काम कर रहे हैं। मामले में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता एन. एस. नप्पिनाई ने सुझाव दिया कि:

  • किल-स्विच तकनीक: इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक विकसित करनी चाहिए जिससे संदिग्ध लेनदेन को तत्काल रोका जा सके।

  • SOP का क्रियान्वयन: आरबीआई ने बैंकों के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SoP) का मसौदा तैयार किया है, जिसमें संदिग्ध खातों पर अस्थायी 'डेबिट होल्ड' लगाने का प्रावधान है।

  • अलर्ट सिस्टम: बैंकों को असामान्य और बड़े लेनदेन पर ग्राहकों को तुरंत अलर्ट भेजने की व्यवस्था करनी होगी।

₹54,000 करोड़ की ठगी: CBI को सौंपी गई जांच

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले डिजिटल फ्रॉड के जरिए हुई ₹54,000 करोड़ से अधिक की ठगी को गंभीर माना था। कोर्ट के आदेश पर ही सीबीआई (CBI) देशव्यापी स्तर पर इन मामलों की जांच कर रही है। कोर्ट ने गुजरात और दिल्ली सरकार को भी निर्देश दिए हैं कि वे जांच में पूर्ण सहयोग करें और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए एक पारदर्शी ढांचा तैयार करें।

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क्या होता है 'डिजिटल अरेस्ट'? यह साइबर ठगी का एक मनोवैज्ञानिक तरीका है। अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल करते हैं। वे दावा करते हैं कि पीड़ित के नाम से कोई अवैध पार्सल पकड़ा गया है या वह किसी केस में वांटेड है। इसके बाद पीड़ित को वीडियो कॉल पर घंटों बंधक (डिजिटल अरेस्ट) रखा जाता है और गिरफ्तारी का डर दिखाकर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।

अगली सुनवाई 12 मई को

अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक सभी सुरक्षा उपायों और SOP को अंतिम रूप दिया जाए। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी।