Movie prime
PMC_Hospital

US-India Trade Deal का असर: डॉलर के मुकाबले रुपया 90.40 पर मजबूत, सेंसेक्स 3,600 अंक उछला

अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया, शेयर बाजार में 5 साल की सबसे बड़ी तेजी
 

Ad

 
Share market
WhatsApp Group Join Now

Ad

नई दिल्ली |  अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क (टैरिफ) में बड़ी कटौती के बाद मंगलवार को भारतीय वित्तीय बाजारों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 1.2% मजबूत होकर 90.40 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो नवंबर 2022 के बाद इसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है।

Ad
Ad

शेयर बाजार में ऐतिहासिक उछाल

ट्रेड डील की सकारात्मक खबर का असर शेयर बाजार पर भी साफ नजर आया।
बीएसई सेंसेक्स सोमवार के 81,666.46 के बंद स्तर से करीब 3,600 अंक उछलकर 85,000 के पार खुला।
वहीं एनएसई निफ्टी 50 ने भी जोरदार छलांग लगाते हुए 1,200 अंकों की बढ़त के साथ 25,088.40 से ऊपर कारोबार की शुरुआत की।

Ad

विशेषज्ञों के मुताबिक निफ्टी करीब 5% की बढ़त के साथ अपने जनवरी में बने ऑल-टाइम हाई से महज 100 अंकों की दूरी पर पहुंच गया है। यह बीते पांच वर्षों में निफ्टी का सबसे मजबूत सिंगल-डे परफॉर्मेंस माना जा रहा है।

क्या है भारत-अमेरिका ट्रेड डील?

नई ट्रेड एग्रीमेंट के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगाए गए टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इस फैसले से टेक्सटाइल, फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

Ad

बॉन्ड यील्ड में भी राहत

बाजार में सकारात्मक माहौल के बीच 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5 बेसिस पॉइंट घटकर 6.72% पर आ गई, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
हालांकि बीते एक सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
यूरोपीय यूनियन के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद बाजार में तेजी आई थी, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2026 भाषण के बाद बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई।

बजट में शेयर लेनदेन पर टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव से निवेशक घबरा गए थे, जिससे बाजार करीब 2% टूट गया और निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-भारत ट्रेड डील के चलते आने वाले दिनों में रुपया और मजबूत हो सकता है, जबकि विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार में तेजी बनी रह सकती है। हालांकि वैश्विक संकेत और घरेलू नीतिगत फैसले आगे की दिशा तय करेंगे।