महाराष्ट्र दिवस पर राज ठाकरे की हुंकार: 'ऑटो वालों की हिम्मत कैसे हुई मराठी न बोलने की?', भाषा विवाद पर दिया बड़ा बयान
राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के नागरिकों से अपनी भाषा के प्रति 'मुखर' होने का किया आह्वान।
मुंबई (भदैनी मिरर): महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) के अवसर पर एक बार फिर मराठी भाषा और अस्मिता के मुद्दे को हवा दे दी है। वसंत व्याख्यानमाला द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ठाकरे ने राज्य की वर्तमान स्थिति पर अफसोस जताया और नागरिकों से अपनी भाषा के प्रति स्वाभिमानी बनने की अपील की।


'ऑटो चालकों की हिम्मत कहां से आती है?'
राज ठाकरे ने ऑटो रिक्शा चालकों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा, "ऑटो रिक्शा चालकों को मराठी में बोलने से इनकार करने की हिम्मत कहां से मिलती है? क्या वे तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल में वहां की स्थानीय भाषा बोलने से इनकार करने की हिम्मत करेंगे?" उन्होंने दावा किया कि जब तक स्थानीय लोग मराठी के प्रति मुखर नहीं होंगे, तब तक बाहरी लोग इसी तरह का व्यवहार करेंगे।

नेताओं और सरकारों पर साधा निशाना
ठाकरे ने महाराष्ट्र की बिगड़ती स्थिति के लिए सभी नेताओं और सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मराठी को 'अभिजात' भाषा का दर्जा प्राप्त है, फिर भी लोग हिंदी के विवादों में उलझे हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मराठी भाषी लोगों को एकजुट होने से रोकने के लिए जानबूझकर उन्हें जाति के आधार पर बांटा जा रहा है।

सचिन तेंदुलकर की तारीफ और शरद पवार का जिक्र
अपने संबोधन में राज ठाकरे ने सचिन तेंदुलकर की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें गर्व होता है जब सचिन वानखेड़े स्टेडियम में मराठी में भाषण देते हैं। वहीं, राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उन्होंने शरद पवार के कृषि क्षेत्र में दिए गए योगदान की सराहना की और बालासाहेब ठाकरे को हिंदुओं को एकजुट करने वाला दुनिया का पहला व्यक्ति बताया।
जातिवाद पर प्रहार
राज ठाकरे ने महान नेताओं को जाति के आधार पर विभाजित करने की प्रवृत्ति की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा फुले और बाबासाहेब आंबेडकर जैसे महापुरुषों के स्मारकों को गर्व से दिखाना चाहिए, न कि उन्हें जाति के दायरे में बांधना चाहिए।
