PM-KISAN: RTI में खुलासा, 7 सालों में ₹46,317 करोड़ का बजट रहा अनयूज्ड; जानें कहां अटका किसानों का पैसा
पीएम-किसान योजना के 7 वित्तीय वर्षों का लेखा-जोखा: 4 साल तय बजट से कम तो 3 साल अधिक हुआ खर्च, FY 2024-25 में बना रिकॉर्ड।
भदैनी मिरर डिजिटल डेस्क। केंद्र सरकार की बहुचर्चित और महत्वाकांक्षी योजना 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (PM-KISAN) को लेकर सूचना का अधिकार (RTI) के तहत एक बड़ा खुलासा हुआ है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2025-26 तक के 7 सालों में आवंटित कुल बजट में से ₹46,317 करोड़ की राशि खर्च ही नहीं हो सकी।


आंकड़ों के गहन विश्लेषण से साफ होता है कि योजना के 7 वर्षों के सफर में 4 साल ऐसे रहे जब तय आवंटन से कम पैसे खर्च हुए, वहीं 3 वित्तीय वर्षों में सरकार ने निर्धारित सीमा से अधिक बजट खर्च किया।
शुरुआती सालों में बजट और वास्तविक खर्च में रहा बड़ा अंतर
योजना की शुरुआत में निर्धारित बजट और असल खर्च के बीच एक बड़ा गैप दर्ज किया गया:

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FY 2019-20: योजना के पहले वर्ष में ₹75,000 करोड़ का भारी-भरकम बजट तय किया गया था, जिसके मुकाबले महज ₹48,714 करोड़ ही इस्तेमाल हो सके।
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FY 2020-21: अगले वित्त वर्ष में फंड का इस्तेमाल बढ़कर ₹60,990 करोड़ तक पहुंचा, लेकिन यह भी ₹75,000 करोड़ के मूल आवंटन से काफी पीछे रह गया।
वर्ष 2024-25 में बना खर्च का नया रिकॉर्ड
बाद के सालों में आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया में तेजी आने से खर्च के आंकड़ों में बड़ा सुधार देखा गया:
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FY 2021-22: ₹65,000 करोड़ के तय बजट के मुकाबले ₹65,785 करोड़ का वास्तविक खर्च दर्ज हुआ।
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FY 2023-24: ₹60,000 करोड़ के आवंटन के सापेक्ष ₹61,441 करोड़ जारी किए गए।
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FY 2024-25: इस वित्तीय वर्ष में ₹60,000 करोड़ के तय बजट से ज्यादा ₹66,138.91 करोड़ खर्च हुए, जो योजना के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक वार्षिक खर्च है।
हालांकि, FY 2022-23 (₹58,254 करोड़) और FY 2025-26 (₹58,860.10 करोड़) में खर्च का आंकड़ा एक बार फिर तय सीमा से नीचे दर्ज किया गया।
किसानों और नीति-निर्माताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये आंकड़े?
शुरुआती वर्षों में बड़े पैमाने पर बजट बच जाने की मुख्य वजह ई-केवाईसी (e-KYC), आधार सीडिंग और पात्र लाभार्थियों के सत्यापन की जटिल प्रक्रियाएं रहीं। हालांकि, बाद के सालों में सत्यापन व्यवस्था मजबूत होने से आवंटन और खर्च का संतुलन बेहतर हुआ है।

