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पहलगाम हमले में पाकिस्तान फिर बेनकाब: ढेर हुए आतंकियों के मोबाइल ने उगले राज, कराची के 'फैसल बैंक' से निकला कनेक्शन

चीन से मंगाए गए थे रेडमी के फोन, 2 साल तक रखे गए एकदम बंद; डिजिटल सबूतों से NIA की जांच में बड़ा खुलासा

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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और स्थानीय पुलिस के हाथ एक बहुत बड़ी कामयाबी लगी है। मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के पास से बरामद दो मोबाइल फोन ने पाकिस्तान की टेरर फंडिंग और आतंकी साजिश का एक नया और चौंकाने वाला चिट्ठा खोल दिया है। जांच में सामने आया है कि इन मोबाइलों के आयात (Import) और रूटिंग का सीधा संबंध पाकिस्तान के कराची स्थित एक प्रमुख बैंक से है, जिसका इतिहास पहले भी आतंकी संगठनों की मदद करने से जुड़ा रहा है।

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मुलनार महादेव मुठभेड़ में ढेर हुए थे 3 खूंखार आतंकी

बीते साल 28 जुलाई 2025 को दचिगाम के मुलनार महादेव इलाके में सुरक्षाबलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में तीन कुख्यात आतंकी मारे गए थे, जिनकी पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई थी। सुरक्षाबलों ने इनके शवों के पास से रेडमी (Xiaomi) सीरीज के दो शाओमी स्मार्टफोन बरामद किए थे—एक 'रेडमी 9T' (ऑरेंज) और दूसरा 'रेडमी नोट 12' (ब्लैक)। इन्हीं दोनों फोन्स के डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगालने पर इस पूरे इंटरनेशनल सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है।

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2 साल तक फोन को रखा 'स्लीपिंग मोड' में; चीन से पाकिस्तान और फिर कश्मीर

मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया सूत्रों के अनुसार, इन फोन्स को भारत में आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए बेहद शातिराना तरीके से इस्तेमाल किया गया:

  • जनवरी 2021 में आए चीन से: 'रेडमी 9T' फोन जनवरी 2021 में चीन से पाकिस्तान के कराची पहुंचा था। इसे पाकिस्तान की कंपनी 'टेक सिरत प्राइवेट लिमिटेड' ने इंपोर्ट किया था।

  • कराची का फैसल बैंक था डिलीवरी एड्रेस: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चीन से आए इस मोबाइल कंसाइनमेंट की लिस्टेड लॉजिस्टिक कंपनी और डिलीवरी एड्रेस कराची स्थित 'फैसल बैंक' (Faysal Bank) का मुख्य कार्यालय था। आशंका है कि आतंकियों के लिए फोन मंगाने की फंडिंग इसी बैंक के जरिए रूट की गई थी।

  • साजिश के तहत 2 साल तक रखा बंद: साल 2023 में खरीदने के बाद इन मोबाइलों को दो साल तक ऑन ही नहीं किया गया, ताकि भारतीय खुफिया एजेंसियां इन्हें ट्रैक न कर सकें। आतंकी आपस में बातचीत के लिए 'लॉन्ग रेंज रेडियो कम्यूनिकेशन' (सैटेलाइट/रेडियो वेव्स) का इस्तेमाल कर रहे थे।

  • हमले से ठीक पहले किया एक्टिव: इन स्मार्टफोन्स को 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले से ठीक पहले एक्टिवेट किया गया था।

आतंकी फंडिंग का पुराना गवाह रहा है 'फैसल बैंक'

पहलगाम हमले की जांच में भले ही बैंक का सीधा हाथ होने की बात अभी शुरुआती स्तर पर है, लेकिन इतिहास गवाह है कि इस बैंक के खाते आतंकी संगठनों से जुड़े रहे हैं। 2007 की एक इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के 9/11 हमले के बाद अदालती दस्तावेजों में सामने आया था कि वैश्विक आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और अल-कायदा से जुड़े लजनत अल दवा के खाते इसी फैसल बैंक में थे। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ने पर बैंक ने इन खातों को फ्रीज करने का दावा किया था।

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दूसरा फोन भी लाहौर से हुआ इंपोर्ट: आतंकियों के पास से मिला दूसरा फोन 'रेडमी नोट 12' लाहौर की एयर लिंक कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा इंपोर्ट किया गया था। इसे भी लंबे समय तक बंद रखने के बाद सीधे कश्मीर में एक्टिव किया गया।

मोबाइल से मिले टेंट के नक्शे और सीक्रेट तस्वीरें

NIA की टेक्निकल टीम ने जब इन फोन्स का डेटा रिकवर किया, तो उसमें से कश्मीर की कई संवेदनशील जगहों के डिजिटल मैप्स, सुरक्षाबलों के मूवमेंट से जुड़ी जानकारियां और आतंकियों के छिपे होने वाले खुफिया टेंटों की तस्वीरें बरामद हुईं। इन डिजिटल सबूतों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के इस पैंतरे को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है कि वह अपनी धरती से भारत के खिलाफ टेरर नेटवर्क को लगातार हवा दे रहा है।