No Place To Hide: भारत की रामजेट आर्टिलरी से दुश्मन के पीछे तक होगा प्रहार, 100 KM से ज्यादा रेंज की तैयारी
IIT मद्रास और भारतीय सेना की स्वदेशी तकनीक, 155 mm रामजेट शेल से भारत बनेगा दुनिया का पहला यूजर
नई दिल्ली/पोखरण। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारतीय सेना जल्द ही 155 मिमी रामजेट-सहायता प्राप्त आर्टिलरी शेल को शामिल करने जा रही है, जिससे भारत यह तकनीक अपनाने वाला दुनिया का पहला देश बन सकता है।



यह अत्याधुनिक तकनीक IIT मद्रास और भारतीय सेना के संयुक्त प्रयास से विकसित की गई है। हाल ही में राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में इसके स्वदेशी रामजेट शेल्स का सफल परीक्षण किया गया।
60 KM से 100 KM+ तक रेंज
सामान्य 155 मिमी आर्टिलरी शेल की मारक क्षमता जहां 30 से 40 किलोमीटर तक सीमित होती है, वहीं रामजेट तकनीक से यह रेंज दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी।

- प्रारंभिक ऑपरेशनल रेंज: 60 से 80 किलोमीटर
- भविष्य का लक्ष्य: 100 किलोमीटर से अधिक
रामजेट इंजन हवा से ऑक्सीजन लेकर फायरिंग के बाद भी लगातार थ्रस्ट देता है, जिससे शेल बेहद लंबी दूरी तक घातक प्रहार कर सकता है।
Mach 3 की रफ्तार, इंटरसेप्ट करना नामुमकिन
रामजेट आर्टिलरी शेल्स की रफ्तार Mach 3 (करीब 3700 किमी/घंटा) तक पहुंच सकती है। इतनी तेज गति पर इन्हें इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव माना जा रहा है।

तकनीक को और बेहतर बनाने पर काम
वर्तमान में यह प्रोजेक्ट ऑप्टिमाइजेशन फेज में है। वैज्ञानिक टीम इन बिंदुओं पर काम कर रही है—
- Mach 3 गति पर स्थिर बर्न रेट
- उड़ान के दौरान ऑक्सीजन कंप्रेशन के लिए एडवांस एयर इंटेक सिस्टम
- गन फायरिंग के दौरान उच्च वेग पर शेल की संरचनात्मक मजबूती
Plug-and-Play, पुराने गनों में भी फिट
IIT मद्रास के प्रोफेसर पी.ए. रामकृष्णन के अनुसार यह तकनीक पूरी तरह “Plug-and-Play” है। यानी मौजूदा 155 मिमी शेल्स में इसे रेट्रोफिट किया जा सकता है।
यह शेल इन सभी तोप प्रणालियों के साथ इस्तेमाल किए जा सकेंगे—
- M777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर
- ATAGS
- धनुष और शरंग गन
- K9 वज्र सेल्फ प्रोपेल्ड गन
दुश्मन के पीछे तक सटीक हमला
रामजेट आर्टिलरी भारत को डीप स्ट्राइक क्षमता प्रदान करेगी। इसके जरिए—
- दुश्मन के कमांड सेंटर
- लॉजिस्टिक्स हब
- एयरफील्ड
को बिना महंगी मिसाइलों के निशाना बनाया जा सकेगा।
वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़त
इस तकनीक से भारत न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि डिफेंस एक्सपोर्ट के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ेगा। साथ ही चीन और पाकिस्तान सीमा पर उच्च तीव्रता वाले संघर्ष में यह भारत को निर्णायक बढ़त दिला सकती है।
