NEET-UG पेपर लीक मामला: सुप्रीम कोर्ट NTA के मिंटो रोड दफ्तर का करेगा औचक निरीक्षण
टास्क फोर्स को 2 हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश; CISF सुरक्षा और नई वर्टिकल व्यवस्था के बीच वेबसाइट पर सार्वजनिक होगी सुधारों की रिपोर्ट
नई दिल्ली / भदैनी मिरर: NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में बुनियादी और प्रशासनिक सुधारों की सख्त निगरानी कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा संकेत दिया है। अदालत ने गुरुवार को कहा कि जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ स्वयं नई दिल्ली के मिंटो रोड स्थित NTA के नए स्थायी कार्यालय का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं, कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की उपलब्धता का जायजा ले सकती है।

"पूरी संस्था प्रतिनियुक्ति के भरोसे न चले"
सुनवाई के दौरान जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी कि NTA के गोपनीय व प्रशासनिक कार्यालय को मिंटो रोड स्थित 55,520 वर्ग फुट के समर्पित सरकारी परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया है, तब जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि पीठ किसी दिन वहां जाकर जमीनी स्थिति देखेगी।

अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि NTA जैसी संवेदनशील संस्था में पर्याप्त संख्या में खुद के स्थायी कर्मचारी होने चाहिए, न कि पूरा स्टाफ प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर होना चाहिए।
नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स 2 सप्ताह में दाखिल करेगी प्रोग्रेस रिपोर्ट
केंद्र सरकार ने पीठ को बताया कि डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के आधार पर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित 'हाई पावर्ड टास्क फोर्स' NTA के पुनर्गठन पर काम कर रही है। अदालत ने टास्क फोर्स के संयुक्त सचिव को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल कर अब तक की प्रगति और क्रियान्वयन का ब्योरा देने का निर्देश दिया।

साथ ही पारदर्शी व्यवस्था कायम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने NTA को अपने सभी सुधार संबंधी हलफनामे अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक (Upload) करने का आदेश दिया।
CISF सुरक्षा, वर्टिकल स्ट्रक्चर और CBT मोड पर विचार
केंद्र सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में NTA के पुनर्गठन के लिए उठाए गए बड़े कदमों का उल्लेख किया गया:
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सुरक्षा व्यवस्था: गोपनीय दफ्तर में एक्स-रे स्क्रीनिंग और 39 सीआईएसएफ (CISF) जवानों की तैनाती।
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नेतृत्व: महानिदेशक पद पर सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति तथा IAS, IPS और ISS अधिकारियों का वरिष्ठ नेतृत्व में समावेश।
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कार्यात्मक बदलाव: परीक्षा-विशिष्ट मॉडल से हटकर फंक्शनल वर्टिकल संरचना लागू करना।
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कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT): पेन-पेपर मोड से कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) की ओर चरणबद्ध बदलाव पर विचार।
इसके अलावा, अदालत ने डॉ. मंगला कोहली (पूर्व सहायक महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं) की याचिका स्वीकार करते हुए सुधारों से जुड़े आम सुझावों के लिए एक समर्पित ईमेल आईडी बनाने का निर्देश भी दिया।
