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मुंबई: 'भगवान राम के खजाने की लूट पर चुप्पी...' सोनम वांगचुक के अनशन पर भड़के राज ठाकरे

नीट परीक्षा धांधली और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन का 19वां दिन; राज ठाकरे बोले- 'ऐसा लगता है सरकार ने वांगचुक की बलि देने का मन बना लिया है'

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मुंबई: देश में नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित धरने में भूख हड़ताल पर बैठे देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और सुधारक सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है।

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इस बीच, केंद्र सरकार द्वारा सोनम वांगचुक के अनशन की अनदेखी किए जाने पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने तीखा हमला बोला है। राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (Twitter) पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस गंभीर सामाजिक मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है।

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'ऐसा लगता है सरकार ने वांगचुक की बलि देने का फैसला कर लिया है'

राज ठाकरे ने सरकार की चुप्पी पर निशाना साधते हुए लिखा, "आज सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 19वां दिन है। उनकी सेहत के बारे में आ रही खबरें और टीवी पर दिख रही तस्वीरें वाकई बेहद चिंताजनक हैं। यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार ने सोनम वांगचुक की बलि देने का फैसला कर लिया है, और इसके साथ ही, इस देश में नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन की गुंजाइश को भी खत्म करने का मन बना लिया है।"

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राज ठाकरे यहीं नहीं रुके, उन्होंने तीखा तंज कसते हुए आगे लिखा कि जब यह सरकार भगवान राम के खजाने को लुटते हुए देखकर भी चुपचाप तमाशबीन बनी रह सकती है, तो आम नागरिकों के विरोध का इस पर क्या असर हो सकता है?

पहले बीजेपी बहुत सम्मान करती थी, अब काम निकलने पर फेरा मुंह: ठाकरे

राज ठाकरे ने भाजपा की राजनीति पर निशाना साधते हुए अतीत की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि एक समय था जब बीजेपी सोनम वांगचुक का बहुत सम्मान करती थी। साल 2018 में वांगचुक को 'री-इन्वेस्ट' कॉन्फ्रेंस में आमंत्रित किया गया था, जहां गैर-पारंपरिक ऊर्जा पर उनके विचारों की जमकर सराहना की गई थी, क्योंकि तब पार्टी को अपनी प्रतिबद्धता दिखानी थी।

ठाकरे ने लिखा कि शुरुआत में जब लद्दाख को अलग क्षेत्र घोषित किया गया, तो वांगचुक ने भी बीजेपी के कदम की सराहना की थी, लेकिन बाद में उन्हें अहसास हुआ कि सरकार के इरादे नेक नहीं थे। उन्होंने साफ किया कि आज वांगचुक की मांग बस इतनी है कि NEET परीक्षा की अव्यवस्था दूर हो, जिम्मेदार मंत्री को पद से हटाया जाए और परीक्षाओं में पारदर्शिता आए, जिसमें कुछ भी गलत नहीं है।

'नेहरू को पीछे छोड़ने का जश्न सिर्फ एक आंकड़ा, युवाओं के लिए करें मजबूत फैसला'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए मनसे प्रमुख ने कहा, "अभी इस बात का बहुत जश्न मनाया जा रहा है कि आपने पंडित नेहरू से ज़्यादा समय तक प्रधानमंत्री का पद संभाला है। लेकिन यह सिर्फ एक आंकड़ा है। इसका असली मतलब तभी है जब आप ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर मजबूत रुख अपनाएं और निर्णायक कार्रवाई करें, तभी अगली पीढ़ी आपको याद रखेगी।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी कोई मामूली बात नहीं है, इसने देश के लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। यह कोई राजनीतिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से एक सामाजिक मुद्दा है, जिससे खुद बीजेपी से जुड़े परिवारों के बच्चे और उनके माता-पिता भी मानसिक रूप से पीड़ित हुए हैं।

19 दिनों में गिरा 9 किलो वजन, अंगों पर मंडराया खतरा

भूख हड़ताल के 19वें दिन सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट बेहद डराने वाली सामने आई है। अनशन के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर 80 mg/dL, पल्स रेट 72 बीट/मिनट और लेटने पर ब्लड प्रेशर 105/61 mmHg रिकॉर्ड किया गया है। लंबे समय से अन्न न ग्रहण करने के कारण उनकी मांसपेशियों के टूटने से शरीर में यूरिक एसिड तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उनके आंतरिक अंगों (इंटरनल ऑर्गन्स) के डैमेज होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।