Monsoon Rain Alert: गुजरात और महाराष्ट्र में भारी बारिश की चेतावनी, जानें IMD का नया अपडेट
बंगाल की खाड़ी से उठे कम दबाव के क्षेत्र के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून के अंतिम चरण में पश्चिम भारत के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इससे पहले यह एक बार फिर सक्रिय रूप पकड़ने जा रहा है। बंगाल की खाड़ी से उठे एक नए कम दबाव (लो-प्रेशर) के क्षेत्र के देश के अंदरूनी हिस्सों की तरफ बढ़ने के कारण पश्चिम भारत के कई इलाकों में अगले कुछ दिनों तक झमाझम बारिश होने की पूरी संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, 12 से 15 सितंबर के बीच कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश देखने को मिल सकती है।

बारिश की मुख्य वजह
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, कम दबाव का यह क्षेत्र किसी प्राकृतिक 'रेन-मेकर' की तरह काम करता है, जो अपने साथ भारी मात्रा में नमी वाली हवाएं खींचता है। यह सिस्टम ऊपर उठकर ठंडी होती है और बादलों का निर्माण कर बारिश का कारण बनती है। दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के पास बने इस सिस्टम के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने से देश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों का मौसम प्रभावित हो रहा है।

किन दो राज्यों में सबसे ज्यादा असर?
इस मौसमी हलचल का सबसे ज्यादा असर गुजरात और महाराष्ट्र पर देखने को मिलेगा:
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गुजरात: राज्य में 12 से 15 सितंबर के दौरान व्यापक रूप से बारिश होने की संभावना है। विशेष तौर पर 13 और 14 सितंबर को दक्षिण गुजरात, सौराष्ट्र-कच्छ और गुजरात क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर आंधी-तूफान और बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है।
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महाराष्ट्र: पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में भी बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी। कोंकण, गोवा और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में झमाझम बारिश के साथ अलग-अलग जगहों पर भारी बौछारें पड़ने की भविष्यवाणी की गई है।
सिस्टम की तेज रफ्तार और प्रभाव
यह मौसमी सिस्टम अपेक्षाकृत काफी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। आमतौर पर धीमी गति वाले सिस्टम एक ही जगह पर टिककर भारी बारिश और जलभराव का खतरा पैदा करते हैं, जबकि तेज गति वाले सिस्टम कम समय में तीव्र दौर की बारिश लाते हैं। हालांकि, यह तेज सिस्टम भी गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में थोड़े समय के लिए ही सही, लेकिन तीव्र और जोरदार मूसलाधार बारिश का कारण बन सकता है।

